ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1203, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अश्विनीकुमारो! तुम गृहपालक के रूप में आओ और हमारे लिए अत्यंत पुष्टिकर्त्ता बनो. तुम हमारे संसार तथा हमारे शरीर के पालनकर्त्ता बनो. तुम हमारे पुत्रों और पौत्रों के घरों में आओ. (११) यदिन्द्रेण सरथं याथो अश्विना यद्वा वायुना भवथः समोकसा. यदादित्येभिर्ऋभुभिः सजोषसा यद्वा विष्णोर्विक्रमणेषु तिष्ठथः.. (१२) हे अश्विनीकुमारो! तुम यदि इंद्र के साथ एक रथ पर बैठकर आते हो, यदि वायु के साथ एक स्थान में रहते हो, यदि अदिति के पुत्र ऋभुओं के साथ प्रसन्न रहते हो तथा यदि विष्णु के कदमों के साथ चलते हो तो हमारे पास आओ. (१२) यद्याश्विनावहं हुवेय वाजसातये. यत्पृत्सु तुर्वणे सहस्तच्छ्रेष्ठमश्विनोरवः.. (१३) मैं अश्विनीकुमारों को जब बुलाऊं, तभी वे मेरे युद्ध में सहायता के लिए आवें. अश्विनीकुमारों के शत्रुनाशन में विजयी रक्षासाधन श्रेष्ठ है. (१३) आ नूनं यातमश्विनेमा हव्यानि वां हिता. इमे सोमासो अधि तुर्वशे यदाविमे कण्वेषु वामथ.. (१४) हे अश्विनीकुमारो! इन हव्यों का निर्माण तुम्हारे निमित्त हुआ है. तुम अवश्य आओ. यह सोम यदु और तुर्वशु राजाओं के पास उपस्थित है, तुम्हारे लिए बनाया गया है एवं कण्वपुत्रों को दिया गया है. (१४) यन्नासत्या पराके अर्वाके अस्ति भेषजम्. तेन नूनं विमदाय प्रचेतसा छर्दिर्वत्साय यच्छतम्.. (१५) हे सत्य स्वरूप अश्विनीकुमारो! जो ओषधियां समीप और दूर के क्षेत्रों में मिलती हैं, उन्हें आप हमें प्राप्त कराएं. विमद की तरह वत्स को भी घर दो. (१५) अभुत्स्यु प्र देव्या साकं वाचाहमश्विनोः. व्यावद्देव्या मतिं वि रातिं मर्त्येभ्यः.. (१६) मैं अश्विनीकुमारों संबंधी दिव्य स्तोत्र के साथ जागा हूं. हे उषादेवी! मेरी स्तुति को सुनकर अंधकार मिटाओ और मानवों को धन दो. (१६) प्र बोधयोषो अश्विना प्र देवि सूनृते महि. प्र यज्ञहोतरानुषक्प्र मदाय श्रवो बृहत्.. (१७) हे शोभन नेत्रों वाली एवं महान् उषादेवी! अश्विनीकुमारों को जगाओ एवं उन्नत बनाओ. ebook converter DEMO Watermarks*