ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1204, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंतुम उनके आनंद के लिए अधिक मात्रा में सोमरस तैयार करो. (१७) यदुषो यासि भानुना सं सूर्येण रोचसे. आ हायमश्विनो रथो वर्तियाति नृपाय्यम्.. (१८) हे उषा! जब तुम अपने प्रकाश के साथ गति करती हो, तब सूर्य के समान दीप्ति वाली लगती हो. उस समय अश्विनीकुमारों का रथ मानवों के यज्ञ में जाता है. (१८) यदापीतासो अंशवो गावो न दुह ऊधभिः. यद्वा वाणीरनूषत प्र देवयन्तो अश्विना.. (१९) हे अश्विनीकुमारो! जिस समय पीले रंग की सोमलता को गाय के थन की तरह निचोड़ा जाता है एवं देवों को चाहने वाले लोग स्तुति करते हैं, उस समय हमारी रक्षा करो. (१९) प्र द्युम्नाय प्र शवसे प्र नृषाह्याय शर्मणे. प्र दक्षाय प्रचेतसा.. (२०) हे उत्तम ज्ञान वाले अश्विनीकुमारो! तुम लोग धन के लिए, बल के लिए, मनुष्यों द्वारा भोगने योग्य सुख के लिए तथा उन्नति के लिए हमारी रक्षा करो. (२०) यन्नूनं धीभिरश्विना पितुर्योना निषीदथः. यद्वा सुम्नेभिरुक्थ्या.. (२१) हे अश्विनीकुमारो! चाहे तुम अपने पिता के समान द्युलोक में बैठे होओ अथवा सुखपूर्वक प्रशंसनीय घर में रहते होओ, दोनों जगहों से हमारे पास आओ. (२१) सूक्त—१० देवता—अश्विनीकुमार यत्स्थो दीर्घप्रसद्मनि यद्वादो रोचने दिवः. यद्वा समुद्रे अध्याकृते गृहेऽत आ यातमश्विना.. (१) हे अश्विनीकुमारो! चाहे तुम प्रशंसनीय यज्ञशालाओं वाले मर्त्यलोक में रहते होओ तथा द्युलोक के दीप्तिशाली भाग में अथवा आकाश में निवास करते हो. तुम इन स्थानों से हमारे पास आओ. (१) यद्वा यज्ञं मनवे संमिमिक्षथुरेवेत्काण्वस्य बोधतम्. बृहस्पतिं विश्वान्देवाँ अहं हुव इन्द्राविष्णू अश्विनावाशुहेषसा.. (२) हे अश्विनीकुमारो! तुम लोगों ने जिस प्रकार मनु के लिए यज्ञ को सफल बनाया था, उसी प्रकार कण्व के यज्ञ को भी समझो. मैं बृहस्पति सभी देवों, इंद्र, विष्णु एवं गतिशील अश्वों वाले अश्विनीकुमारों को बुलाता हूं. (२) ebook converter DEMO Watermarks*