ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1219, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्तोता लोग शत्रुओं का धन देखकर पक्षपात प्राप्त करने के लिए इंद्र को बुलाते हैं. इंद्र जिनका पक्षपात करते हैं, वे विजयी होते हैं. (५) तमिच्च्यौत्नैरार्यन्ति तं कृतेभिश्चर्षणयः. एष इन्द्रो वरिवस्कृत्.. (६) मनुष्य शक्तिशाली स्तोत्रों एवं यज्ञकर्मों द्वारा उन्हीं इंद्र को स्वामी बनाते हैं. इंद्र ही स्तोताओं को धन देने वाले हैं. (६) इन्द्रो ब्रह्मेन्द्र ऋषिरिन्द्रः पुरू पुरुहूतः. महान्महीभिः शचीभिः.. (७) इंद्र सर्वाधिक महान्, ऋषि, अनेक द्वारा कई बार बुलाए हुए एवं वृत्र वधादि महान् कार्यों के कारण महान् हैं. (७) स स्तोम्यः स हव्यः सत्यः सत्वा तुविकूर्मिः. एकश्चित्सन्नभिभूतिः.. (८) इंद्र स्तुति करने योग्य, बुलाने योग्य, सत्यस्वभाव, शत्रुनाशक, अनेक कर्म करने वाले एवं अकेले होने पर भी शत्रुपराजयकारी हैं. (८) तमर्केभिस्तं सामभिस्तं गायत्रैश्चर्षणयः. इन्द्रं वर्धन्ति क्षितयः.. (९) मंत्रद्रष्टा लोग एवं साधारण जन उन इंद्र को यजुर्वेद के पूजोपयोगी मंत्रों, सामवेद के गाने योग्य मंत्रों एवं गायत्री छंद में लिखित स्तुतियों द्वारा बढ़ाते हैं. (९) प्रणेतारं वस्यो अच्छा कर्तारं ज्योतिः समत्सु. सासह्वांसं युधामित्रान्..(१०) इंद्र अभिमुख होकर प्रशंसनीय धन देने वाले, युद्धों में जयरूपी प्रकाश करने वाले एवं युद्ध के द्वारा शत्रुओं को हराने वाले हैं. (१०) स नः पप्रिः पारयाति स्वस्ति नावा पुरुहूतः. इन्द्रो विश्वा अति द्विषः.. (११) पूर्ण करने वाले एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र हमें नाव के द्वारा सभी शत्रुओं से कुशलपूर्वक पार करें. (११) स त्वं न इन्द्र वाजेभिर्दशस्या च गातुया च. अच्छा च नः सुम्नं नेषि.. (१२) हे इंद्र! तुम अपनी शक्ति द्वारा हमें धन एवं मार्ग प्रदान करो. तुम सुख को हमारे सामने लाओ. (१२) सूक्त—१७ देवता—इंद्र आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम्. इदं बर्हिः सदो मम.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*