भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1222, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1222

वाले और सुखवर्धक हैं. (२) तत्सु नः सविता भगो वरुणो मित्रो अर्यमा. शर्म यच्छन्तु सप्रथो यदीमहे.. (३) हम जिस विस्तृत सुख की याचना करते हैं, वही हमें सविता, भग, वरुण, मित्र एवं अर्यमा दें. (३) देवेभिर्देव्यदितेऽरिष्टभर्मन्ना गहि. स्मत्सूरिभिः पुरुप्रिय सुशर्मभिः.. (४) हे देवि अदिति! तुम जिसका भरण करती हो, उसकी कोई हिंसा नहीं कर सकता. तुम बहुतों को प्रिय हो. तुम शोभन सुख वाले एवं बुद्धिमान् देवों के साथ भली प्रकार आओ. (४) ते हि पुत्रासो अदितेर्विदुर्द्वेषांसि योतवे. अंहोश्चिदुरुरुचक्रयोऽनेहसः.. (५) अदिति के वे पुत्र द्वेषी राक्षसों को अलग करना जानते हैं. बड़े-बड़े कामों को करने वाले एवं रक्षक देव हमें पाप से अलग करना चाहते हैं. (५) अदितिनो दिवा पशुमदितिर्नक्त मद्धयाः. अदितिः पात्वंहसः सदावृधा. (६) अदिति दिन में हमारे पशुओं की रक्षा करें. बाहर एवं भीतर से समान रहने वाली अदिति रात में हमारे पशुओं की रक्षा करें. वे हमें सदा बढ़ने वाले पाप से बचावें. (६) उत स्या नो दिवा मतिरदितिरूत्या गमत्. सा शन्ताति मयस्करदप सिध्रः.. (७) स्तुति के योग्य वे अदिति अपने रक्षासाधनों द्वारा दिन में हमारे पास आवें, हमें शांतिदाता सुख दें एवं हमारे बाधकों को दूर करें. (७) उत त्या दैव्या भिषजा शं नः करतो अश्विना. युयुयातामितो रपो अप सिध्रः.. (८) देवों के प्रसिद्ध वैद्य अश्विनीकुमार हमें सुख दें, हमसे पाप को हटावें एवं शत्रुओं को दूर भगावें. (८) शमग्निरग्निभिः करच्छं नस्तपतु सूर्यः. शं वातो वात्वरपा अप सिध्रः.. (९) अग्नि देव गार्हपत्यादि विविध अग्नियों द्वारा हमें आरोग्य का सुख दें. सूर्य हमारे लिए सुखदाता बनकर तपें. पापरहित वायु सुख देने के लिए बहे एवं शत्रुओं को हमसे दूर रखें. (९) अपामीवामप स्रिधमप सेधत दुर्मतिम्. आदित्यासो युयोतना नो अंहसः.. (१०) हे आदित्यो! हमसे रोगों को दूर करो, शत्रुओं को अलग हटाओ एवं हमसे दुष्टबुद्धि को दूर रखो. आदित्यगण हमें पापों से अलग करें. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*