भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1234, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1234

शत्रुपराभवकारी इंद्र हमारे सामने आवें। हे इंद्र! तुम्हारे मित्र हम लोग सेवा करने योग्य एवं सबके रक्षक तुम्हारा वरण करते हैं। (२) आ याहीम इन्द्रवोऽश्वपते गोपत उर्वरापते। सोमं सोमपते पिब.. (३) हे अश्वों के स्वामी, गायों का पालन करने वाले, उपजाऊ भूमि के स्वामी एवं सेनापति इंद्र! यहां आओ और सोमरस पिओ। (३) वयं हि त्वा बन्धुमन्तमबन्धवो विप्रास इन्द्र येमिम। या ते धामानि वृषभ तेभिरा गहि विश्वेभिः सोमपीतये.. (४) हे बांधवों वाले इंद्र! हम बांधवहीन विप्र तुम्हारे समीप मित्रता से आते हैं। हे अभिलाषापूरक इंद्र! तुम अपने समस्त तेजों के साथ सोमरस पीने के लिए आओ। (४) सीदन्तस्ते वयो यथा गोश्रीते मधौ मदिरे विवक्षणे। अभि त्वामिन्द्र नोनुमः.. (५) हे इंद्र! गाय के दूध-दही से मिले हुए मदकारक एवं स्वर्गप्राप्ति के हेतु तुम्हारे सोमरस में हम पक्षियों के समान निवास करते हैं एवं तुम्हारी स्तुति करते हैं। (५) अच्छा च त्वैना नमसा वदामसि किं मुहुश्चिद्धि दीधयः। सन्ति कामासो हरिवो ददिष्ट्वं स्मो वयं सन्ति नो धियः.. (६) हे इंद्र! हम तुम्हारे अभिमुख होकर इस स्तोत्र द्वारा तुम्हारी स्तुति करते हैं। तुम क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! तुम्हारी बहुत सी अभिलाषाएं हैं। तुम दान करने वाले हो। हम एवं हमारे यज्ञकर्म तुम्हारे ही समीप हैं। (६) नूत्ना इदिन्द्र ते वयमूती अभूम नहि नू ते अद्रिवः। विद्मा पुरा परीणसः.. (७) हे इंद्र! तुम्हारी रक्षा पाकर हम नवीन ही रहेंगे। हे वज्रधारी इंद्र! पहले हम तुम्हें सब जगह व्याप्त नहीं जानते थे, पर इस समय जान गए हैं। (७) विद्मा सखित्वमुत शूर भोज्य१मा ते ता वज्रिन्नीमहे। उतो समस्मिन्ना शिशीहि नो वसो वाजे सुशिप्र गोमति.. (८) हे शूर इंद्र! हम तुम्हारी मित्रता एवं भोज्य को जानते हैं। हे वज्रधारी इंद्र! हम तुम्हारी ये ही दोनों वस्तुएं मांगते हैं। हे निवासस्थानदाता एवं शोभन टोप वाले इंद्र! हमें गाय आदि से युक्त सभी धनों से संपन्न करो। (८) यो न इदमिदं पुरा प्र वस्य आनिनाय तमु वः स्तुषे। सखाय इन्द्रमूतये.. (९) हे मित्र ऋत्विजो! जो इंद्र प्राचीन समय में यह सारा धन हमारे लिए लाए थे, तुम्हारी ebook converter DEMO Watermarks*