ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1249, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरि यो रश्मिना दिवोऽन्तान्ममे पृथिव्याः. उभे आ पप्रौ रोदसी महित्वा.. (१८) मित्र स्वर्ग एवं पृथ्वी के अंतिम भागों को अपने तेज द्वारा प्रकाशित करते हैं एवं द्यावा- पृथिवी दोनों को अपने महत्त्व से पूर्ण करते हैं. (१८) उदु ष्य शरणे दिवो ज्योतिरयंस्त सूर्यः. अग्निर्न शुक्रः समिधान आहुतः.. (१९) सबके प्रेरक मित्रवरुण सूर्य के स्थान अंतरिक्ष में अपना प्रकाश फैलाते हैं. अग्नि के समान दीप्तिशाली, हव्यों द्वारा बढ़े हुए एवं सबके द्वारा बुलाए गए वे देव आकाश में स्थित होते हैं. (१९) वचो दीर्घप्रसद्मनीशे वाजस्य गोमतः. ईशे पित्वोऽविषस्य दावने.. (२०) हे स्तोता! विस्तृत घर वाले यज्ञ में मित्र व वरुण की स्तुति करो. वरुण पशुओं वाले धन के स्वामी हैं. वे महान् प्रतिकारक अन्न देने में समर्थ हैं. (२०) तत्सूर्यं रोदसी उभे दोषा वस्तोरुप ब्रुवे. भोजेष्वस्माँ अभ्युच्चरा सदा.. (२१) मैं मित्र व वरुण के तेज, द्यावा-पृथिवी एवं दिन-रात की स्तुति करता हूं. हे वरुण! हमें सदा दाता के सामने ले जाओ. (२१) ऋज्रमुक्षण्यायने रजतं हरयाणे. रथं युक्तमसनाम सुषामणि.. (२२) उक्ष गोत्र में उत्पन्न एवं सुषामा के पुत्र राजा वरु ने जब दान देना आरंभ किया था, तब हमें सीधा चलने वाला, चांदी का बना हुआ एवं दो घोड़ों से युक्त रथ मिला था. वरु का रथ शत्रुओं का जीवन, धन आदि हरण करता है. (२२) ता मे अश्व्यानां हरीणां नितोशना. उतो नु कृत्व्यानां नृवाहसा.. (२३) राजा वरु द्वारा हमारे लिए ऐसे दो घोड़े शीघ्र दिए जावें, जो हरि नामक घोड़ों के समूह में शत्रुओं को अधिक बाधा पहुंचाने वाले, युद्ध में कुशल एवं मनुष्यों का वहन करने वाले हों. (२३) स्मदभीशू कशावन्ता विप्रा नविष्ठया मती. महो वाजिनावर्वन्ता सचासनम्.. (२४) मैं मित्रादि देवों की अति नवीन स्तुति द्वारा शोभन रस्सियों वाले, हंटर से युक्त, बुद्धिमानों के योग्य एवं तेज चलने वाले दो घोड़े प्राप्त करता हूं. (२४) सूक्त—२६ देवता—अश्विनीकुमार आदि युवोरू षू रथं हुवे सधस्तुत्याय सूरिषु. अतूर्तदक्षा वृषणा वृषण्वसू.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*