ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1256, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयन्निमुचि प्रबुधि विश्ववेदसो यद्वा मध्यन्दिने दिवः.. (१९) हे प्रसन्न करने वाले बल से युक्त देवो! आज सूर्य का उदय होने पर हमारे लिए कल्याणकारक घर दो. हे सब धन के स्वामी देवो! सूर्यास्त के समय, प्रातःकाल अथवा दोपहर के समय हमें घर दो. (१९) यद्वाभिपित्वे असुरा ऋतं यते छर्दिर्र्यम वि दाशुषे. वयं तद्वो वसवो विश्ववेदस उप स्थेयाम मध्य आ.. (२०) हे बुद्धिसंपन्न, समस्त धन के स्वामी एवं निवासस्थान देने वाले देवो! इस यज्ञ में तुम्हारे आने के उद्देश्य से हवि देने वाले एवं यज्ञ की ओर जाने वाले यजमान को तुम घर देते हो तो हम तुम्हारे उसी कल्याणकारी घर में तुम्हारी पूजा करेंगे. (२०) यदद्य सूर उदिते यन्मध्यन्दिन आतुचि. वामं धत्थ मनवे विश्ववेदसो जुह्वानाय प्रचेतसे.. (२१) हे समस्त धन के स्वामी देवो! आज सूर्योदय के समय, दोपहर को एवं शाम के समय हवन करने वाले तथा उत्तम ज्ञानी मनु के लिए तुम सुंदर धन धारण करते हो. (२१) वयं तद्वः सम्राज आ वृणीमहे पुत्रो न बहुपाय्यम्. अश्याम तदादित्या जुह्वतो हविर्येन वस्योऽनशामहै.. (२२) हे भली प्रकार सुशोभित देवो! तुम्हारे पुत्र-तुल्य हम बहुतों के भोगयोग्य उसी धन की याचना करते हैं. हे आदित्यो! हम उस धन को प्राप्त करें एवं यज्ञ करते हुए उस धन के द्वारा अधिक संपन्नता प्राप्त करें. (२२) सूक्त—२८ देवता—विश्वेदेव ये त्रिंशति त्रयस्परो देवासो बर्हिरासदन्. विदन्नह द्वितासनन्.. (१) जो तेंतीस देवता कुशों पर बैठे थे, वे हमें समझें एवं दोनों प्रकार का धन दें. (१) वरुणो मित्रो अर्यमा स्मद्रातिषाचो अग्नयः. पत्नीवन्तो वषट्कृताः.. (२) मैंने वरुण, मित्र एवं यजमान को धन देने वाले अग्नियों को वषट् के द्वारा पत्नीसहित बुलाया है. (२) ते नो गोपा अपाच्यास्त उदक्त इत्था न्यक्. पुरस्तात्सर्वया विशा.. (३) वे वरुणादि देव अपने सभी अनुचरों के साथ सामने से, पीछे से, ऊपर से और नीचे से ebook converter DEMO Watermarks*