ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1259, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—३१ देवता—यज्ञ यो यजाति यजात इत्सुनवच्च पचाति च. ब्रह्मेदिन्द्रस्य चाकनत्.. (१) जो यजमान यज्ञ करता है, देवों के लिए हव्य देता है, सोमरस निचोड़ता है एवं पुरोडाश पकाता है, वह इंद्र संबंधी मंत्रों को बार-बार बोलता है. (१) पुरोळाशं यो अस्मै सोमं ररत आशिरम्. पादित्तं शक्रो अंहसः.. (२) जो यजमान इंद्र को पुरोडाश एवं गाय के दूध से मिला सोमरस देता है, उसे इंद्र पाप से बचाते हैं, यह निश्चित है. (२) तस्य द्युमाँ असद्रथो देवजूतः स शूशुवत्. विश्वा वन्वन्नमित्रिया.. (३) देवों की पूजा करने वाले यजमान के पास देवों द्वारा भेजा हुआ तेजस्वी रथ आता है. यजमान उस रथ द्वारा शत्रुओं की समस्त बाधाओं को नष्ट करता हुआ समृद्ध होता है. (३) अस्य प्रजावती गृहेऽसश्वन्ती दिवेदिवे. इळा धेनुमती दुहे.. (४) इस यजमान के घर में संतानयुक्त, कहीं न जाने वाला एवं गायों सहित अन्न प्रतिदिन प्राप्त किया जाता है. (४) या दम्पती समनसा सुनुत आ च धावतः. देवासो नित्ययाशिरा.. (५) हे देवो! जो पतिपत्नी समान विचार से सोमरस निचोड़ते हैं, उसे दशापवित्र द्वारा शुद्ध करते हैं एवं तीसरे सवन में उस में गोदुग्ध मिलाते हैं. (५) प्रति प्राशव्याँ इतः सम्यञ्चा बर्हिराशाते. न ता वाजेषु वायतः.. (६) वे भोजन के योग्य अन्न देवों से प्राप्त करते हैं, मिलकर यज्ञ के कुशों पर बैठते हैं एवं किसी के पास अन्न मांगने नहीं जाते. (६) न देवानाम्पि ह्रुत: सुमतिं न जुगुक्षतः. श्रवो बृहद्विवासतः.. (७) हे देवो! वे पतिपत्नी देवों के प्रति बुरी बातें नहीं करते एवं तुम्हारे प्रति शोभन बुद्धि को समाप्त करना नहीं चाहते. वे अधिक अन्न द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. (७) पुत्रिणा ता कुमारिणा विश्वमायुर्व्यश्नुतः. उभा हिरण्यपेशसा.. (८) वे शिशुओं एवं कुमारों वाले पतिपत्नी सोने के गहनों से युक्त होकर पूर्ण आयु प्राप्त करते हैं. (८) ebook converter DEMO Watermarks*