भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1258, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1258

त्रीण्वेक उरुगायो वि चक्रमे यत्र देवासो मदन्ति.. (७) बहुतों की स्तुति के पात्र विष्णु ने अकेले ही तीन चरणों से सभी भुवनों में गमन किया था. इन लोगों में देव प्रसन्न होते हैं. (७) विभिर्द्वा चरत एकया सह प्र प्रवासेव वसत:.. (८) अश्वों द्वारा चलने वाले दो अश्विनीकुमार प्रवासी पुरुषों के समान एक नारी सूर्या के साथ रहते हैं. (८) सदो द्वा चक्राते उपमा दिवि सम्राजा सर्पिरासुती.. (९) भली प्रकार सुशोभित घृतरूप हवि वाले एवं एक-दूसरे के उपमान मित्र एवं वरुण दो देव द्युलोकरूपी को बनाते हैं. (९) अर्चन्त एके महि साम मन्वत तेन सूर्यमरोचयन्.. (१०) अत्रिवंशी ऋषि महान् साममंत्र बोलते हुए सूर्य को दीप्तिशाली बनाते हैं. (१०) सूक्त—३० देवता—विश्वेदेव नहि वो अस्त्यर्भको देवासो न कुमारक:. विश्वे सतोमहान्त इत्.. (१) हे देवो! तुम में कोई शिशु या कुमार नहीं है. तुम सभी महान् हो. (१) इति स्तुतासो असथा रिशादसो ये स्थ त्रयश्च त्रिंशच्च. मनोर्र्देवा यज्ञियास:.. (२) हे शत्रुनाशक एवं मनु के यज्ञ के पात्र देवो! तुम तेंतीस हो, ऐसा कहकर तुम्हारी स्तुति की जाती है. (२) ते नस्त्राध्वं तेऽवत त उ नो अधि वोचत. मा न: पथ: पित्र्यान्मानवादधि दूरं नैष्ट परावत:.. (३) हे देवो! हमें राक्षसों से बचाओ, हमारी रक्षा करो एवं हमसे अच्छी तरह बोलो. हमारे पिता मनु के दूरागत मार्ग से हमें भ्रष्ट मत करना. (३) ये देवास इह स्थन विश्वे वैश्वानरा उत. अस्मभ्यं शर्म सप्रथो गवेऽश्वाय यच्छत.. (४) हे विश्वेदेव एवं अग्नि! तुम यहां स्थित होओ. तुम हमें सर्वत्र प्रसिद्ध सुख, गाय एवं घोड़ा दो. (४) ebook converter DEMO Watermarks*