ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1263, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयन्तारं महि स्थिरं पृतनासु श्रवोजितम्. भूरीरीशानमोजसा.. (१४) इंद्र यज्ञ में आने वाले, युद्धों में अत्यंत स्थिर, अन्न को जीतने वाले एवं शक्ति द्वारा बहुत धन के स्वामी हैं. (१४) नकिरस्य शचीनां नियन्ता सूनृतानाम्. नकिर्वक्ता न दादिति.. (१५) इंद्र के शोभन कर्मों का नियंत्रण करने वाला कोई नहीं है. इंद्र दान नहीं करते, ऐसा कोई नहीं कह सकता. (१५) न नूनं ब्रह्मणामृणं प्राशूनामस्ति सुन्वताम्. न सोमो अप्रता पपे.. (१६) सोमरस निचोड़ने और पीने वाले ब्राह्मणों पर देवऋण नहीं रहता. अधिक धन के बिना कोई सोमरस नहीं पी सकता है. (१६) पन्य इदुप गायत पन्य उक्थानि शंसत. ब्रह्मा कृणोत पन्य इत्.. (१७) हे गायको! स्तुति योग्य इंद्र के लिए गाओ. हे स्तोताओ! इंद्र के लिए मंत्र बोलो एवं स्तोत्र बनाओ. (१७) पन्य आ दर्दिरच्छता सहस्रा वाज्यवृतः. इन्द्रो यो यज्वनो वृधः.. (१८) स्तुति योग्य, बलवान्, यज्ञवर्धक एवं शत्रुओं द्वारा न घिरने वाले इंद्र ने सैकड़ों और हजारों शत्रुओं को विदीर्ण किया है. (१८) वि षू चर स्वधा अनु कृष्टीनामन्वाहुवः. इन्द्र पिब सुतानाम्.. (१९) हे बुलाने योग्य इंद्र! प्रजाओं के हव्य के समीप जाओ एवं निचोड़ा हुआ सोमरस पिओ. (१९) पिब स्वधैनवानामृत यस्तुग्रये सचा. उतायमिन्द्र यस्तव.. (२०) हे इंद्र! अपनी गाय के बदले खरीदे गए एवं जल की सहायता से तैयार किए गए इस अपने सोमरस को पिओ. (२०) अतीहि मन्युषाविणं सुषुवांसमुपारणे. इमं रातं सुतं पिब.. (२१) हे इंद्र! क्रोध के साथ एवं बुरे स्थान में सोमरस निचोड़ने वाले को लांघकर चले जाओ. हमारे द्वारा दिए हुए इस सोमरस को पिओ. (२१) इहि तिस्रः परावत इहि पञ्च जनाँ अति. धेना इन्द्रावचाकशतू.. (२२) हे इंद्र! तुमने हमारी स्तुतियों को समझा है. इसलिए आगे-पीछे तथा आसपास से एवं ebook converter DEMO Watermarks*