ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1264, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंगंधर्वों, पितरों, देवों, असुरों और राक्षसों को लांघकर हमारे पास आओ. (२२) सूर्यो रश्मिं यथा सृजा ऽऽत्वा यच्छन्तु मे गिरः. निम्नमापो न सध्र्यक्.. (२३) हे इंद्र! जिस प्रकार सूर्य किरणें देते हैं, उसी प्रकार तुम मुझे धन दो. जैसे जल नीचे स्थान में पहुंच जाता है उसी प्रकार मेरी स्तुतियां तुम्हारे पास पहुंचें. (२३) अध्वर्यवा तु हि षिञ्च सोमं वीराय शिप्रिणे. भरा सुतस्य पीतये.. (२४) हे अध्वर्युगण! शोभन जबड़ों वाले एवं वीर इंद्र के लिए सोमरस दो एवं उन्हें सोमरस पीने के लिए बुलाओ. (२४) य उदन्: फलिगं भिनन्य१क्सिन्धूँरवासृजत्. यो गोषु पक्वं धारयत्.. (२५) इंद्र ने जल के लिए मेघ को विदीर्ण किया, जलधाराओं को नीचे गिराया एवं गायों में दूध धारण किया. (२५) अहन्वृत्रमृचीषम और्णवाभमहीशुवम्. हिमेनाविध्यदर्बुदम्.. (२६) दीप्तिशाली इंद्र ने वृत्र, और्णनाभ एवं अहीशुव को मारा एवं तुषार जल से बादल का भेदन किया. (२६) प्र व उग्राय निष्ठुरेऽषाळहाय प्रसक्षिणे. देवत्तं ब्रह्म गायत.. (२७) हे उद्गाताओ! तुम उग्र, शत्रुनाशक, शत्रुपराभवकारी और शत्रुओं का धन बलपूर्वक हरण करने वाले इंद्र के लिए देवों की कृपा से स्तुतियां गाओ. (२७) यो विश्वान्यभि व्रता सोमस्य मदे अन्धसः. इन्द्रो देवेषु चेतति.. (२८) इंद्र पिए हुए सोमरस का नशा चढ़ने पर समस्त यज्ञकर्म देवों को बताते हैं. (२८) इह त्या सधमाद्या हरी हिरयण्केश्या. वोळहामभि प्रयो हितम्.. (२९) सुनहरे बालों वाले एवं हरि नामक घोड़े एक साथ इंद्र को इस यज्ञ में सोमरस रूपी हव्य के सामने ले आवें. (२९) अर्वाञ्चं त्वा पुरुष्टुत प्रियमधस्तुता हरी. सोमपेयाय वक्षतः.. (३०) हे बहुतों द्वारा स्तुत इंद्र! प्रियमेध ऋषि द्वारा प्रशंसित हरि नामक घोड़े तुम्हें सोमरस पीने के लिए हमारे सामने लावें. (३०) सूक्त—३३ देवता—इंद्र ebook converter DEMO Watermarks*