भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1269, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1269

दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो.. (६) हे स्वर्ग कुटुंबी इंद्र! तुम हमारे पास आओ. हे विश्वरक्षक इंद्र! हमारी रक्षा के लिए आओ. हे दीप्त हवि वाले इंद्र! तुम द्युलोक का शासन करते हो इसलिए द्युलोक में जाओ. (६) आ नो याहि महेमते सहस्रोते शतामघ. दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो.. (७) हे महाबुद्धिशाली, हजार रक्षासाधनों वाले तथा अधिक धनयुक्त इंद्र! तुम हमारे समीप आओ. हे दीप्त हवि वाले इंद्र! तुम द्युलोक का शासन करते हो, इसलिए द्युलोक में जाओ. (७) आ त्वा होता मनुर्हितो देवत्रा वक्षदीड्यः. दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो.. (८) हे इंद्र! देवताओं में स्तुति योग्य देवों को बुलाने वाला एवं मनुष्यों द्वारा गृह में स्थापित अन्न तुम्हें अन्न वहन करे. हे दीप्त हवि वाले इंद्र! तुम द्युलोक का शासन करते हो, इसलिए द्युलोक में जाओ. (८) आ त्वा मदच्युता हरी श्येनं पक्षेव वक्षतः. दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो.. (९) हे इंद्र! जिस प्रकार बाज अपने दोनों पंखों को ढोता है, उसी प्रकार मतवाले हरि नामक घोड़े तुम्हें वहन करें. हे दीप्त हवि वाले इंद्र! तुम द्युलोक का शासन करते हो, इसलिए द्युलोक में जाओ. (९) आ याह्यर्य आ परि स्वाहा सोमस्य पीतये. दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो.. (१०) हे स्वामी इंद्र! तुम चारों ओर से आओ. तुम्हारे पीने के लिए मैं स्वाहा बोलकर सोमरस देता हूं. हे दीप्त हवि वाले इंद्र! तुम द्युलोक का शासन करते हो, इसलिए द्युलोक में जाओ. (१०) आ नो याह्युपश्रुत्युक्थेषु रणया इह. दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो.. (११) हे इंद्र! उक्थ मंत्रों के पाठ के समय तुम इस यज्ञ के समीप आओ एवं हमें प्रसन्न करो. (११) ebook converter DEMO Watermarks*

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