ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1273, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअङ्गिरस्वन्ता उत विष्णुवन्ता मरुत्वन्ता जरितुर्गच्छथो हवम्. सजोषसा उषसा सूर्येण चादित्यैर्यातमश्विना.. (१४) हे अश्विनीकुमारो! तुम अंगिरा, विष्णु एवं मरुतों के साथ स्तोता की पुकार सुनने जाओ. तुम उषा, सूर्य एवं आदित्यों के साथ आओ. (१४) ऋभुमन्ता वृषणा वाजवन्ता मरुत्वन्ता जरितुर्गच्छथो हवम्. सजोषसा उषसा सूर्येण चादित्यैर्यातमश्विना.. (१५) हे अश्विनीकुमारो! तुम ऋभुओं, अभिलाषापूरक बाज एवं मरुतों के साथ स्तोता की पुकार सुनने जाओ. तुम उषा, सूर्य एवं आदित्यों के साथ आओ. (१५) ब्रह्म जिन्वतमुत जिन्वतं धियो हतं रक्षांसि सेधतममीवाः. सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं सुन्वतो अश्विना.. (१६) हे अश्विनीकुमारो! तुम स्तोत्रों तथा यज्ञों को जीतो, राक्षसों को मारो एवं रोगों को वश में करो. तुम उषा तथा सूर्य के साथ मिलकर यजमान का सोमरस पिओ. (१६) क्षत्रं जिन्वतमुत जिन्वतं नृन्हतं रक्षांसि सेधतममीवाः. सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं सुन्वतो अश्विना.. (१७) हे अश्विनीकुमारो! तुम क्षत्रियों एवं योद्धाओं को जीतो, राक्षसों को मारो तथा रोगों को वश में करो. तुम उषा और सूर्य के साथ मिलकर यजमान का सोमरस पिओ. (१७) धेनूर्जिन्वतमुत जिन्वतं विशो हतं रक्षांसि सेधतममीवाः. सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं सुन्वतो अश्विना.. (१८) हे अश्विनीकुमारो! तुम गायों एवं अश्वों को जीतो. तुम राक्षसों को मारो तथा रोगों को वश में करो. तुम सूर्य तथा उषा के साथ मिलकर यजमान का सोम पिओ. (१८) अत्रेरिव शृणुतं पूर्व्यस्तुतिं श्यावाश्वस्य सुन्वतो मदच्युता. सजोषसा उषसा सूर्येण चाश्विना तिरोअह्नयम्.. (१९) हे शत्रुओं का गर्व नष्ट करने वाले अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार तुमने अत्रि मुनि की स्तुति सुनी, उसी प्रकार मुझ श्यावाश्व की भी सुनो. तुम उषा और सूर्य के साथ मिलकर प्रातःकाल सोमरस पिओ. (१९) सर्गाँ इव सृजतं सुष्टुतीरुप श्यावाश्वस्य सुन्वतो मदच्युता. सजोषसा उषसा सूर्येण चाश्विना तिरोअह्नयम्.. (२०) हे शत्रुओं का गर्व नष्ट करने वाले अश्विनीकुमारो! मुझ सोमरस निचोड़ने वाले श्यावाश्व ebook converter DEMO Watermarks*