भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1282, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1282

इंद्र एवं अग्नि सभी शत्रुओं को नष्ट करें. (९) तं शिशीता सुवृक्तिभिस्त्वेषं सत्वानमृग्मियम्. उतो नु चिद्य ओजसा शुष्णस्याण्डानि भेदति जेषत्स्वर्वतीरपो नभन्तामन्यके समे.. (१०) हे स्तोताओ! दीप्त, धन देने वाले व ऋक् मंत्रों के योग्य इंद्र का संस्कार शोभन-स्तुतियों द्वारा करो. अपनी शक्ति द्वारा शुष्ण असुर की संतान का नाश करने वाले इंद्र स्वर्ग का जल जीतते हैं. इंद्र एवं अग्नि सभी शत्रुओं को मारें. (१०) तं शिशीता स्वध्वरं सत्यं सत्वानमृत्वियम्. उतो नु चिद्य ओहत आण्डा शुष्णस्य भेदत्यजैः स्वर्वतीरपो नभन्तामन्यके समे.. (११) हे स्तोताओ! शोभन-यज्ञ वाले विनाशरहित, धनसंपन्न एवं ऋतुओं के अनुकूल यज्ञ का संस्कार स्तुतियों द्वारा करो. यज्ञ के अभिमुख जाने वाले इंद्र शुष्ण असुर की संतान को मारते हैं एवं स्वर्ग का जल जीतते हैं. इंद्र एवं अग्नि सभी शत्रुओं को मारें. (११) एवेन्द्राग्निभ्यां पितृवन्नवीयो मन्धातृवदङ्गिरस्वदवाचि. त्रिधातुना शर्मणा पातमस्मान् वयं स्याम पतयो रयीणाम्.. (१२) मैंने अपने पिता मांधाता एवं अंगिरा ऋषि के समान नवीन स्तुतियों को बोला है. वे तीन कमरों वाले मकान को देकर हमारी रक्षा करें. हम धनों के स्वामी हों. (१२) सूक्त—४१ देवता—वरुण अस्मा ऊ षु प्रभूतये वरुणाय मरुद्भ्योऽर्चा विदुष्टरेभ्यः. यो धीता मानुषाणां पश्वो गा इव रक्षति नभन्तामन्यके समे.. (१) हे स्तोता! अधिक धन पाने के लिए वरुण एवं अधिक विद्वान् मरुतों की स्तुति करो. वे गायों के समान ही मानवों के पशुओं की रक्षा करते हैं. वरुण हमारे सभी शत्रुओं को मारें. (१) तमू षु समना गिरा पितॄणां च मन्मभिः. नाभाकस्य प्रशस्तिभिर्यः सिन्धूनामुपोदये सप्तस्वसा स मध्यमो नभन्तामन्यके समे.. (२) मैं शोभन-स्तुति द्वारा वरुण तथा स्तोत्रों द्वारा पितरों की प्रशंसा करता हूं. मैं नाभाक ऋषि द्वारा निर्मित प्रशंसाओं से वरुण की स्तुति करता हूं. वरुण नदियों के समीप उदित होते हैं. उनकी सात बहिनें हैं, जिन में वे बीच के हैं. वे सभी शत्रुओं को मारें. (२) ebook converter DEMO Watermarks*