भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1329, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1329

वे चितकबरे रंग की गाएं तीनों सवनों में इंद्र से संबंधित सोमरस को अपने दूध से मिश्रित करती हैं जो देवों के जन्मस्थान एवं आदित्य के मनपसंद द्युलोक में प्रवेश कर सकती हैं एवं जिनके दूध से कुआं भर सकता है. (३) अभि प्र गोपर्ति गिरेन्द्रमर्च यथा विदे. सूनुं सत्यस्य सत्पतिम्.. (४) गायों के पालक, यज्ञ के पुत्र एवं साधुओं का पालन करने वाले इंद्र की स्तुति उसी प्रकार करो, जिस प्रकार वे यज्ञ के प्रति जाने का रास्ता जान सकें. (४) आ हरयः ससृजिरेऽरुषीरधि बर्हिषि. यत्राभि सन्नवामहे.. (५) दीप्तिशाली एवं हरितवर्ण के अश्व इंद्र को कुश पर स्थापित करें. हम वहां स्थित इंद्र की स्तुति करेंगे. (५) इन्द्राय गाव आशिरं दुदुहे वज्रिणे मधु. यत्सीमुपह्वरे विदत्.. (६) जिस समय वज्रधारी इंद्र समीप में रखे हुए सोमरस को प्राप्त करते हैं, उस समय गाएं इंद्र के लिए मधुर दूध देती हैं जो सोमरस में मिलाया जा सके. (६) उद्वद् ब्रध्नस्य विष्टपं गृहमिन्द्रश्च गन्वहि. मध्वः पीत्वा सचेवहि त्रिः सप्त सख्युः पदे.. (७) मैं एवं इंद्र जिस समय सूर्य के निवासस्थान में जाते हैं, उस समय मधुर सोमरस पीकर सबके सखा आदित्य के इक्कीस स्थानों में हम एकत्रित हों. (७) अर्चत प्रार्चत प्रियमैधासो अर्चत. अर्चन्तु पुत्रका उत पुरं न धृष्ण्वर्चत.. (८) हे प्रियमेध ऋषि के वंश वाले लोगो! इंद्र की विशेष रूप से पूजा करो. तुम्हारे पुत्र और तुम इंद्र की इस प्रकार पूजा करो, जिस प्रकार शत्रु का नगर नष्ट करने वाले वीर की पूजा की जाती है. (८) अव स्वराति गर्गरो गोधा परि सनिष्षणत्. पिङ्गा परि चनिष्कददिन्द्राय ब्रह्मोद्यतम्.. (९) घर्घर ध्वनि करता हुआ युद्ध का बाजा बज रहा है. हाथों पर बंधा हुआ गोह का चमड़ा भी शब्द कर रहा है. पीले रंग की धनुषडोरी शब्द कर रही है. इंद्र को लक्ष्य करके इस समय स्तुति बोलो. (९) आ यत्पतन्त्येन्यः सुदुघा अनपस्फुरः. अपस्फुरं गृभायत सोममिन्द्राय पातवे.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*