भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1333

त्वं न इन्द्र ऋतयुस्त्वानिदो नि तृम्पसि. मध्ये वसिष्व तुविन्मृणोर्वोर्नि दासं शिश्नथो हथैः.. (१०) हे यज्ञाभिलाषी इंद्र! तुम अपने निंदक का धन छीनकर बहुत प्रसन्न होते हो. हे अधिक धन वाले इंद्र! हमारी रक्षा के लिए तुम हमें अपनी दोनों जांघों के बीच छिपा लो एवं हमसे द्वेष करने वाले दासों को आयुधों द्वारा मारो. (१०) अन्यव्रतममानुषमयज्वानमदेवयुम्. अव स्वः सखा दुधुवीत पर्वतः सुघ्नाय दस्युं पर्वतः.. (११) हे इंद्र! तुम्हारे मित्र पर्वत ऋषि तुम्हारे अतिरिक्त किसी अन्य के लिए यज्ञ करने वाले, मानव से भिन्न, यज्ञरहित व देवों को न मानने वाले को स्वर्ग से नीचे गिरा देते हैं एवं दस्यु को मृत्यु की ओर प्रेरित करते हैं. (११) त्वं न इन्द्रासां हस्ते शविष्ठ दावने. धानानां न सं गृभायास्मयुर्द्धिः सं गृभायास्मयुः.. (१२) हे शक्तिशाली इंद्र! तुम हमें देने की अभिलाषा से गायों को इस प्रकार ग्रहण करो, जिस प्रकार जौ हाथ में लिए जाते हैं. तुम हमें देने की अभिलाषा से अधिक वस्तुएं हाथ में लो. (१२) सखायः क्रतुमिच्छत कथा राधाम शरस्य. उपस्तुतिं भोजः सूरियों अहयः.. (१३) अध्वर्यु मित्रो! तुम इंद्र संबंधी यज्ञ करने की इच्छा करो. हम शत्रुहिंसक इंद्र की स्तुति कैसे करेंगे? शत्रुओं को खाने वाले एवं मित्रों के रक्षक इंद्र शत्रुओं को झुकाते हैं. (१३) भूरिभिः समह ऋषिभिर्बर्हिष्मद्भिः स्तविष्यसे. यदित्यमेकेमेकमिच्छर वत्सानपराददः.. (१४) हे सब लोगों द्वारा पूज्य इंद्र! बहुत से ऋषियों और ऋत्विजों द्वारा तुम्हारी स्तुति की जाती है. हे शत्रुनाशक इंद्र! तुम स्तोताओं को एक-एक करके अनेक प्रकार से बछड़े देते हो. (१४) कर्णगृह्या मघवा शौरदेव्यो वत्सं नस्त्रिभ्य आनयत्. अजां सूरिर्न धातवे.. (१५) धनी इंद्र संग्राम में शत्रुओं से छीनी हुई गायों को एवं उनके बछड़ों को कान पकड़कर हमारे पास इस प्रकार ले आवें, जिस प्रकार बालक बकरी को पानी पिलाने ले जाता है. (१५) सूक्त—६० देवता—अग्नि