ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1334, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः. उत द्विषो मर्त्यस्य.. (१) हे अग्नि! तुम महाधन देकर दानरहित लोगों से हमारी रक्षा करो एवं हमें शत्रु लोगों से बचाओ. (१) नहि मन्युः पौरुषेय ईशे हि वः प्रियजात. त्वमिदसि क्षपावान्.. (२) हे प्रिय जन्म वाले अग्नि! पुरुषों का क्रोध तुम्हें बाधा नहीं पहुंचा सकता. तुम ही रात में तेजस्वी हो. (२) स नो विश्वेभिर्देवेभिरूर्जो नपाद्द्रशोचे. रयिं देहि विश्ववारम्.. (३) हे शक्ति के नाती एवं स्तुति योग्य प्रकाश वाले अग्नि! तुम सब देवों के साथ मिलकर हमें सबके वरण करने योग्य धन दो. (३) न तमग्ने अरातयो मर्तं युवन्त रायः. यं त्रायसे दाश्वांसम्.. (४) हे अग्नि! तुम जिस हव्यदाता यजमान का पालन करते हो, उसे धनी एवं दानरहित लोग अपने से अलग नहीं कर सकते. (४) यं त्वं विप्र मेधसातावग्ने हिनोषि धनाय. स तवोती गोषु गन्ता.. (५) हे अग्नि! जिस हव्यदाता यजमान का तुम यज्ञ में धन देने के लिए प्रेरित करते हो, वह तुम्हारे द्वारा सुरक्षित होकर गायों वाला बनता है. (५) त्वं रयिं पुरुवीरमग्ने दाशुषे मर्ताय. प्र णो नय वस्यो अच्छ.. (६) हे अग्नि! तुम हव्य देने वाले मनुष्य को अनेक वीर पुत्रों से युक्त धन देते हो, इसलिए हमें भी निवासस्थान देने योग्य धन दो. (६) उरुष्या णो मा परा दा अघायते जातवेदः. दुराध्ये३ मर्ताय.. (७) हे जातवेद अग्नि! हमारी रक्षा करो. हमें पाप की इच्छा करने वाले एवं हिंसकबुद्धि मनुष्य को मत सौंपो. (७) अग्ने माकिष्टे देवस्य रातिमदेवो युयोत. त्वमीशिषे वसूनाम्.. (८) हे दीप्तिशाली अग्नि! तुम धनों के स्वामी हो. कोई भी देवरहित व्यक्ति तुम्हारे दान को दूर नहीं कर सकता. (८) स नो वस्व उप मास्यूर्जो नपान्माहिनस्य. सखे वसो जरितृभ्यः.. (९) हे बल के नाती, सखा एवं निवासस्थान देने वाले अग्नि! तुम हम स्तोताओं को महान् ebook converter DEMO Watermarks*