भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1340, कुल 1855 में से

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हे अश्विनीकुमारो! हजारों गायों एवं अश्वों को हमसे दूर मत करना. तुम्हारी रक्षा हमारे पास रहे. (१५) अरुणप्सुरुषा अभूदकञ्ज्योतिर्र्ऋतावरी. अन्ति षद्भूतु वामवः.. (१६) हे अश्विनीकुमारो! श्वेत वर्ण वाली उषा प्रकाश फैलाती हुई सब जगह जाती है. तुम्हारी रक्षा हमारे पास रहे. (१६) अश्विना सु विचाकशद्वृक्षं परशुमाँ इव. अन्ति षद्भूतु वामवः.. (१७) हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार लकड़हारा कुल्हाड़ी से पेड़ काटता है, उसी प्रकार अग्नि अंधकार को मिटाते हैं. तुम्हारी रक्षा हमारे पास रहे. (१७) पुरं न धृष्णवा रुज कृष्णया बाधितो विशा. अन्ति षद्भूतु वामवः.. (१८) हे शत्रुओं को दबाने वाले ऋषि सप्तवध्रि! तुम काले संदूक में बंद थे. बाद में अश्विनीकुमारों की कृपा से तुमने बाहर निकल कर उसे जला दिया था. अश्विनीकुमारों की रक्षा हमारे पास रहे. (१८) सूक्त—६३ देवता—अग्नि आदि विशोविशो वो अतिथिं वाजयन्तः पुरुप्रियम्. अग्निं वो दुर्यं वचः स्तुषे शूषस्य मन्मभिः.. (१) हे अन्नाभिलाषी ऋत्विजो एवं यजमानो! तुम सारी प्रजा के अतिथि एवं बहुतों के प्रिय अग्नि की सेवा स्तुति द्वारा करो. मैं तुम्हारी सुखप्राप्ति के लिए सुंदर स्तुतियों द्वारा गूढ़वचन बोलता हूं. (१) यं जनासो हविष्मन्तो मित्रं न सर्पिरासुतिम्. प्रशंसन्ति प्रशस्तिभिः.. (२) लोग हव्य धारण करके एवं घी का हवन करते हुए अग्नि की स्तुति सूर्य के समान करते हैं. (२) पन्यांसं जातवेदसं यो देवतात्युद्यता. हव्यान्यैरयद्दिवि.. (३) अग्नि स्तोता के यज्ञकर्म की प्रशंसा करने वाले, जातवेद तथा यज्ञ में डाले गए हव्य को स्वर्ग में ले जाने वाले हैं. (३) आगन्म वृत्रहन्तमं ज्येष्ठमग्निमानवम्. यस्य श्रुतर्वा बृहन्नाक्षों अनीक एधते.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*

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