ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1342, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अग्नि! दुःखी लोग अन्न एवं धन पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम युद्ध में जागो. (१२) अहं हुवान आर्क्षे श्रुतर्वणि मदच्युति. शर्धांसीव स्तुकाविनां मृक्षा शीर्षा चतुर्णाम्.. (१३) मैं यज्ञदीक्षा के लिए बुलाए जाने पर शत्रुगर्वनाशक, ऋक्षपुत्र एवं श्रुतर्वा नामक राजाओं द्वारा दिए गए बालों वाले चार घोड़ों का शीश इस प्रकार स्पर्श करता हूं, जिस प्रकार लोग बालों को छूते हैं. (१३) मां चत्वार आशवः शविष्ठस्य द्रवित्नवः. सुरथासो अभि प्रयो वक्षन्वयो न तुप्र्यम्.. (१४) अतिशय अन्न वाले राजा श्रुतर्वा के द्रुतगामी एवं शोभन रथ में जुते हुए चार घोड़े अन्न को इस प्रकार ढोते हैं, जिस प्रकार अश्विनीकुमारों द्वारा भेजी गई नावों ने तुंग के पुत्र भुज्यु को वहन किया था. (१४) सत्यमित्त्वा महेनदि परुष्ण्यव देदिशम्. नेमापो अश्वदातरः शविष्ठादस्ति मर्त्यः.. (१५) हे महती परुष्णी नदी एवं महान् जल! मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूं. इस शक्तिशाली राजा श्रुतर्वा की अपेक्षा कोई भी मनुष्य अधिक घोड़े नहीं दे सकता है. (१५) सूक्त—६४ देवता—अग्नि युक्ष्वा हि देवहूतमाँ अश्वाँ अग्ने रथीरिव. नि होता पूर्व्यः सदः.. (१) हे अग्नि! रथी जिस प्रकार घोड़ों को रथ में जोड़ता है, उसी प्रकार तुम भी देवों को बुलाने में कुशल अपने घोड़ों को रथ में जोड़ो. तुम प्रधान होता बनकर बैठो. (१) उत नो देव देवाँ अच्छा वोचो विदुष्टरः. श्रद्धिश्वा वार्या कृधि.. (२) हे अग्नि देव! तुम देवों के समीप हमें अधिक विद्वान् बताओ एवं हमारे वरणयोग्य धन को देवों के पास पहुंचाओ. (२) त्वं ह यद्यविष्ठ्य सहसः सूनवाहुत. ऋतावा यज्ञियो भुवः.. (३) हे अतिशय युवा, बल के पुत्र एवं सब ओर से बुलाए गए अग्नि! तुम सत्ययुक्त एवं यज्ञ के योग्य हो. (३) eBook converter DEMO Watermarks*