भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1344, कुल 1855 में से

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युद्ध में छोड़ मत देना. शत्रुओं द्वारा संगृहीत धन को तुम हमारे लिए जीतो. (१२) अन्यमस्मद्विया इयमग्ने सिषक्तु दुच्छुना. वर्धा नो अमवच्छवः.. (१३) हे अग्नि! यह भय हमारे अतिरिक्त लोगों के पास जाए. तुम युद्ध में हमारे बल एवं वेग को बढ़ाओ. (१३) यस्याजुषन्नमस्विनः शमीमदुर्मखस्य वा. तं घेदग्निर्वृधावति.. (१४) जिस नमस्कार करने वाले एवं दोषहीन यज्ञयुक्त व्यक्ति का यज्ञकर्म अग्नि स्वीकार करते हैं, उसी के पास अग्नि जाते हैं. (१४) परस्या अधि संवतोऽवराँ अभ्या तर. यत्राहमस्मि ताँ अव.. (१५) हे अग्नि! शत्रुओं की सेनाओं को हमारी सेनाओं से पराजित कराओ. मैं जिस सेना के बीच में हूं, तुम उसकी रक्षा करो. (१५) विद्या हि ते पुरा वयमग्ने पितुर्यथावसः. अधा ते सुम्नमीमहे.. (१६) हे पालक अग्नि! हम पहले के समान इस समय भी तुम्हारी रक्षा को जानते हैं. उस समय हम तुमसे सुख मांगते हैं. (१६) सूक्त—६५ देवता—इंद्र इमं नु मायिनं हुव इन्द्रमीशानमोजसा. मरुत्वन्तं न वृज्जसे.. (१) मैं यज्ञशाली, अपनी शक्ति द्वारा सब पर शासन करने वाले एवं मरुतों के साथ इंद्र को शत्रुओं का छेदन करने के लिए बुलाता हूं. (१) अयमिन्द्रो मरुत्सखा वि वृत्रस्याभिनच्छिरः. वज्रेण शतपर्वणा.. (२) इंद्र ने मरुतों के साथ मिलकर सौ पर्वों वाले वज्र द्वारा वृत्र का सिर काटा. (२) वावृधानो मरुत्सखेन्द्रो वि वृत्रमैरयत्. सृजन्त्समुद्रिया अपः.. (३) इंद्र मरुतों की सहायता लेकर बढ़े. इंद्र ने वृत्र का सिर काटा और अंतरिक्ष का जल बनाया. (३) अयं ह येन वा इदं स्वर्मरुत्वता जितम्. इन्द्रेण सोमपीतये.. (४) ये इंद्र वह ही हैं, जिन्होंने मरुतों को साथ लेकर सोमरस पीने के लिए स्वर्ग को जीता था. (४) eBook converter DEMO Watermarks*

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