भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1345

मरुत्वन्तमृजीषिणमोजस्वन्तं विरप्शिनम्. इन्द्रं गीर्भिर्हवामहे.. (५) हम मरुतों से युक्त, ऋजीष के भागी, वृद्धियुक्त एवं महान् इंद्र को स्तुतियों द्वारा बुलाते हैं. (५) इन्द्रं प्रत्नेन मन्मना मरुत्वन्तं हवामहे. अस्य सोमस्य पीतये.. (६) हम इस सोम को पीने के लिए मरुतों सहित इंद्र को प्राचीन स्तोत्रों द्वारा बुलाते हैं. (६) मरुत्वाँ इन्द्र मीढ्वः पिबा सोमं शतक्रतो. अस्मिन्यज्ञे पुरुष्टुत.. (७) हे फलदायक, शतक्रतु, मरुतों से युक्त एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! तुम इस यज्ञ में आकर सोमरस पिओ. (७) तुभ्येदिन्द्र मरुत्वते सुताः सोमासो अद्रिवः. हृदा हूयन्त उक्थिनः.. (८) हे वज्रधारी इंद्र! मरुतों सहित तुम्हारे लिए सोमरस निचोड़ा गया है. उक्थ मंत्र बोलने वाले लोग मन से तुम्हें बुलाते हैं. (८) पिबेदिन्द्र मरुत्सखा सुतं सोमं दिविष्टिषु. वज्रं शिशान ओजसा.. (९) हे मरुतों के मित्र इंद्र! तुम हमारे यज्ञों में निचोड़ा हुआ सोमरस पिओ एवं अपनी शक्ति द्वारा वज्र को तेज करो. (९) उत्तिष्ठन्नोजसा सह पीत्वी शिप्रे अवेपयः. सोममिन्द्र चमू सुतम्.. (१०) हे इंद्र! तुम पात्र में भरे सोमरस को पीकर शक्ति के साथ बड़े होओ एवं अपने जबड़ों को कंपाओ. (१०) अनु त्वा रोदसी उभे ऋक्षमाणमकृपेताम्. इन्द्र यद्दस्युहाभवः.. (११) हे शत्रुओं का विनाश करने वाले इंद्र! जब तुम दस्यु लोगों का नाश करते हो, तभी द्यावा-पृथिवी दोनों तुम्हारा कल्याण करते हैं. (११) वाचमष्टापदीमहं नवस्रक्तिमृतस्पृशम्. इन्द्रात् परि तन्वं ममे.. (१२) मैं इंद्र की स्तुति करता हूं तथा आठ एवं नौ दिशाओं में यज्ञ स्पर्श करने वाली स्तुति को भी इंद्र से कम समझता हूं. (१२) सूक्त—६६ देवता—इंद्र जज्ञानो नु शतक्रतुर्वि पृच्छदिति मातरम्. क उग्राः के ह शृण्विरे.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*