भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1346, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1346

शतक्रतु इंद्र ने जन्म लेते ही अपनी माता से पूछा— “कौन उग्र एवं कौन प्रसिद्ध है?” (१) आदीं शवस्यब्रवीदौर्णवाभमहीशुवम्. ते पुत्र सन्तु निष्टुरः.. (२) इंद्र की माता शवसी ने तभी कहा— “ऊर्णनाभ, अहीशुव आदि अनेक असुर हैं. तुम उन्हें समाप्त करो.” (२) समित्तान्वत्रहाखिदत्खे अराँ इव खेदया. प्रवृद्धो दस्युहाभवत्.. (३) वृत्रनाशक इंद्र ने उन्हें एक साथ इस प्रकार खींचा जिस प्रकार रस्सी से चक्र के अरे खींचे जाते हैं. इंद्र दस्युजनों को मारकर बढ़े. (३) एकया प्रतिधापिबत्साकं सरांसि त्रिंशतम्. इन्द्रः सोमस्य काणुका.. (४) इंद्र ने एक साथ ही सोमरस से भरे हुए तीन सुंदर उक्थ मंत्रों को पी लिया. (४) अभि गन्धर्वमतृणद्बुध्‍नेषु रजः स्वा. इन्द्रो ब्रह्मभ्य इदवृधे.. (५) इंद्र ने ब्राह्मणों की वृद्धि के लिए आधाररहित अंतरिक्ष में मेघ को सब ओर से मारा. (५) निराविध्यद् गिरिभ्य आ धारयत्पक्वमोदनम्. इन्द्रो बुन्दं स्वाततम्.. (६) इंद्र ने मनुष्यों के लिए पके हुए अन्न का निर्माण करने के लिए बड़ा सा बाण लेकर बादल को छेदा. (६) शतब्रध्न इषुस्तव सहस्रपर्ण एक इत्. यमिन्द्र चकृषे युजम्.. (७) हे इंद्र! तुम युद्ध में जिस एकमात्र बाण की सहायता लेते हो, उस में आगे फलक हैं एवं पीछे हजार पंख हैं. (७) तेन स्तोतृभ्य आ भर नृभ्यो नारिभ्यो अत्तवे. सद्यो जात ऋभुष्ठिर.. (८) हे इंद्र! हम स्तोताओं, हमारे पुत्रों और हमारी नगरियों के भोग के लिए उसी बाण की सहायता से पर्याप्त धन ले आओ. तुम जन्म के समय ही विशाल एवं स्थिर थे. (८) एता च्यौत्नानि ते कृता वर्षिष्ठानि परीणसा. हृदा वीड्वधारयः.. (९) हे इंद्र! तुमने इन उत्कृष्ट, अतिशय बढ़े हुए एवं चारों ओर फैले पर्वतों को बनाया है. तुम इन्हें बुद्धि में स्थिररूप से धारण करो. (९) विश्वेत्ता विष्णुराभरदुरुक्रमस्त्वेषितः. शतं महिषान्क्षीरपाकमोदनं वराहमिन्द्र एमुषम्.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*