भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1348

क्रत्व इत्पूर्णमुदरं तुरस्यास्ति विधतः. वृत्रघ्नः सोमपाव्नः.. (७) शीघ्रता करने वाले, वृत्रनाशक एवं सोमरस पीने वाले इंद्र का उदर यजमान के यज्ञ से ही पूर्ण है. (७) त्वे वसूनि सङ्गता विश्वा च सोम सौभगा. सुदात्वपरिह्वृता.. (८) हे सोमरस पीने वाले इंद्र! हमारे अभिलषित पदार्थ तुम्हारे पास एकत्र हैं. तुम में सभी सौभाग्य मिलित हैं. तुम्हारे शोभन दान कुटिलतारहित होते हैं. (८) त्वामिद्यवयुर्मम कामो गव्युर्हिरण्ययुः. त्वामश्वयुरेषते.. (९) हे इंद्र! मेरा मन जौ, गाय, सोने और घोड़े का अभिलाषी बनकर तुम्हारे समीप जाता है. (९) तवेदिन्द्राहमाशासा हस्ते दात्रं चना ददे. दिनस्य वा मघवन्तत्सम्भृतस्य वा पूर्धि यवस्य काशिना.. (१०) हे इंद्र! तुम्हारी आशा करके ही मैं हाथ में दरांत धारण करता हूं. तुम पहले दिन काटे और साफ किए जौ से मेरी मुट्ठी पूरी करो. (१०) सूक्त—६८ देवता—सोम अयं कृत्नुरगृभीतो विश्वजिदुद्भिदित्सोमः. ऋषिर्विप्रः काव्येन.. (१) ये सोम सब कुछ करने वाले, अन्नों द्वारा गृहीत न होने वाले, सबके नेता, फल को उत्पन्न करने वाले, ज्ञानवान्, मेधावी एवं स्तोत्र द्वारा पूज्य हैं. (१) अभ्यूर्णोति यन्नग्नं भिषक्ति विश्वं यत्तुरम्. प्रेमान्धः ख्यन्निः श्रोणो भूत्.. (२) सोम नंगों को ढकते हैं एवं सभी रोगियों की चिकित्सा करते हैं. सोम ऊंचे होने पर भी देखते हैं और लूले होकर भी चलते हैं. (२) त्वं सोम तनूकृद्भ्यो द्वेषोभ्योऽन्यकृतेभ्यः. उरु यन्तासि वरूथम्.. (३) हे सोम! तुम शरीर का छेदन करने वाले अन्य राक्षसों के प्रिय कार्यों से हमारी रक्षा करते हो. (३) त्वं चित्ती तव दक्षैर्दिव आ पृथिव्या ऋजीषिन्. यावीरघस्य चिद् द्वेषः.. (४) हे ऋजीष वाले सोम! तुम अपनी प्रजा और बलों द्वारा द्युलोक एवं धरती से हमें मारने ebook converter DEMO Watermarks*