भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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हे अग्नि! तुम ही हमारी स्तुतियां सुनकर हमें उत्तम धन, घर एवं अन्न प्रदान करो. (६) कस्य नूनं परीणसो धियो जिन्वसि दम्पते. गोषाता यस्य ते गिरः.. (७) हे गार्हपत्य अग्नि! तुम इस समय किसके विचित्र यज्ञकर्मों से प्रसन्न होते हो? तुम्हारी स्तुतियां गायों का लाभ कराने वाली होती हैं. (७) तं मर्जयन्त सुक्रतुं पुरोयावानमाजिषु. स्वेषु क्षयेषु वाजिनम्.. (८) यजमान अपनी यज्ञशालाओं में शोभन बुद्धि वाले, युद्धों में आगे चलने वाले एवं शक्तिशाली अग्नि की पूजा करते हैं. (८) क्षेति क्षेमेभिः साधुभिर्नकिर्यं घ्नन्ति हन्ति यः. अग्ने सुवीर एधते.. (९) हे अग्नि! जो व्यक्ति उत्तम रक्षासाधनों के साथ अपने घर में रहता है, उसे कोई नहीं मारता. जो अपने शत्रुओं को स्वयं मारता है, वह शोभन संतान के साथ बढ़ता है. (९) सूक्त—७४ देवता—अश्विनीकुमार आ मे हवं नासत्याश्विना गच्छतं युवम्. मध्वः सोमस्य पीतये.. (१) सत्यस्वरूप अश्विनीकुमारो! तुम मेरी पुकार सुनकर मधुर सोमरस पीने के लिए मेरे यज्ञ में आओ. (१) इमं मे स्तोममश्विनेमं मे शृणुतं हवम्. मध्वः सोमस्य पीतये.. (२) हे अश्विनीकुमारो! मधुर सोमरस पीने के लिए मेरी इन स्तुतियों एवं पुकार को सुनो. (२) अयं वां कृष्णो अश्विना हवते वाजिनीवसू. मध्वः सोमस्य पीतये.. (३) हे अन्नयुक्त धन के स्वामी अश्विनीकुमारो! यह कृष्ण नामक ऋषि मधुर सोमरस पीने के लिए तुम्हें बुलाता है. (३) शृणुतं जरितुर्हवं कृष्णस्य स्तुवतो नरा. मध्वः सोमस्य पीतये.. (४) हे नेता अश्विनीकुमारो! स्तुति करने वाले कृष्ण ऋषि की पुकार सुनो और मधुर सोमरस पीने के लिए आओ. (४) छर्दैर्यन्तमदाभ्यं विप्राय स्तुवते नरा. मध्वः सोमस्य पीतये.. (५) हे नेता अश्विनीकुमारो! स्तुति करने वाले ब्राह्मण कृष्ण के लिए शत्रुओं की हिंसा से ebook converter DEMO Watermarks*