ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1356, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंरहित घर दो एवं सोमरस पीने के लिए आओ. (५) गच्छतं दाशुषो गृहमित्था स्तुवतो अश्विना. मध्वः सोमस्य पीतये.. (६) हे अश्विनीकुमारो! इस प्रकार स्तुति करते हुए स्तोता के घर तुम मधुर सोमरस पीने के लिए जाओ. (६) युञ्जाथां रासभं रथे वीळ्वङ्गे वृषण्वसू. मध्वः सोमस्य पीतये.. (७) हे अभिलाषापूरक धन वाले अश्विनीकुमारो! मधुर सोमरस पीने के लिए दृढ़ अंगों वाले अपने रथ में गधों को जोड़ो. (७) त्रिवन्धुरेण त्रिवृता रथेना यातमश्विना. मध्वः सोमस्य पीतये.. (८) हे अश्विनीकुमारो! मधुर सोमरस पीने के लिए तीन वंधुराओं तथा तीन कोनों वाले रथ की सहायता से आओ. (८) नू मे गिरो नासत्याश्विना प्रावतं युवम्. मध्वः सोमस्य पीतये.. (९) हे सत्यस्वरूप अश्विनीकुमारो! तुम मधुर सोमरस पीने के लिए मेरे स्तुतिवचनों की ओर जल्दी आओ. (९) सूक्त—७५ देवता—अश्विनीकुमार उभा हि दस्रा भिषजा मयोभुवोभा दक्षस्य वचसो बभूवथुः. ता वां विश्वको हवते तनूकृथे मा नो वि यौष्टं सख्या मुमोचतम्.. (१) हे दर्शनीय देवों के वैद्य एवं सुख देने वाले अश्विनीकुमारो! तुम लोग दक्ष द्वारा की गई उपस्थिति के समय उपस्थित थे. मैं विश्वक नामक ऋषि तुम्हें संतानप्राप्ति के उद्देश्य से बुलाता हूं. हम ऋषियों और स्तोताओं की मित्रता मत तोड़ना. तुम अपने घोड़े यहां आकर रथ से अलग करो. (१) कथा नूनं वां विमना उ स्तवद्युवं धियं ददथुर्वस्य इष्टये. ता वां विश्वको हवते तनूकृथे मा नो वि यौष्टंसख्या मुमोचतम्.. (२) हे अश्विनीकुमारो! विमना नामक ऋषि ने किस प्रकार तुम्हारी स्तुति की थी, कि तुमने उसे धन देने के लिए अपने मन में निश्चय किया? उसी प्रकार मैं विश्वक ऋषि तुम्हें बुलाता हूं. हमारी मित्रता न छूटे. यहां आकर तुम अपने घोड़ों की लगाम अलग करो. (२) युवं हि ष्मा पुरुभुजेममेधतुं विष्णाप्वे ददथुर्वस्य इष्टये. ebook converter DEMO Watermarks*