भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1366, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1366

अरं हि ष्मा सुतेषु णः सोमेष्विन्द्र भूषसि. अरं ते शक्र दावने.. (२६) हे इंद्र! हमारे सोमरस निचुड़ जाने पर तुम उन्हें पीने के लिए पर्याप्त हो. हे दानशील एवं शक्तिशाली इंद्र! सोमरस तुम्हारे लिए पर्याप्त हो. (२६) पराकात्ताच्चिदद्रिवस्त्वां नक्षन्त नो गिरः. अरं गमाम ते वयम्.. (२७) हे वज्रधारी इंद्र! हमारे स्तुतिवचन दूर रहकर भी तुम्हें प्राप्त हों. तुमसे हम पर्याप्त धन प्राप्त करें. (२७) एवा ह्यसि वीरयुरेवा शूर उत स्थिरः. एवा ते राध्यं मनः... (२८) हे इंद्र! तुम वीरों की इच्छा करने वाले, शूर एवं स्थिर हो. तुम्हारा मन आराधना करने योग्य है. (२८) एवा रातिस्तुवीमघ विश्वेभिर्धायि धातृभिः. अधा चिदिन्द्र मे सचा.. (२९) हे अधिक धन वाले इंद्र! सभी यजमान तुम्हारा दिया हुआ धन धारण करते हैं. तुम मेरे साथी बनो. (२९) मो षु ब्रह्मेव तन्द्रयुर्भुवो वाजानां पते. मत्स्वा सुतस्य गोमतः.. (३०) हे अन्नों के स्वामी इंद्र! तुम स्तोता के समान आलसी मत बनना. तुम गोदुग्ध मिला हुआ सोमरस पीकर प्रसन्न बनो. (३०) मा न इन्द्राभ्याऽदिशः सूरो अक्तुष्व्वा यमन्. त्वा युजा वनेम तत्.. (३१) हे इंद्र! रात के समय फैलने वाले राक्षस हमारे अधिकारी न बनें. तुम्हारी सहायता से हम उनका विनाश करेंगे. (३१) त्वयेदिन्द्र युजा वयं प्रति ब्रुवीमहि स्पृधः. त्वमस्माकं तव स्मसि.. (३२) हे इंद्र! तुम्हारी सहायता से हम शत्रुओं को भगा देंगे. तुम हमारे हो और हम तुम्हारे हैं. (३२) त्वामिद्धि त्वायवोऽनुनोनुवतश्चरन्. सखाय इन्द्र कारवः.. (३३) हे इंद्र! तुम्हारी अभिलाषा एवं बार-बार स्तुति करने वाले तुम्हारे मित्र स्तोता स्तुतियों द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. (३३) सूक्त—८२ देवता—इंद्र ebook converter DEMO Watermarks*