ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1367, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंउद्घेदभि श्रुतामघं वृषभं नर्यापसम्. अस्तारमेषि सूर्य.. (१) हे शोभन वीर्य वाले इंद्र! तुम प्रसिद्ध धन वाले, अभिलाषापूरक, मानवहितैषी एवं दाता यजमान के चारों ओर जाते हो. (१) नव यो नवतिं पुरो बिभेद बाह्वोजसा. अहिं च वृत्रहावधीत्.. (२) वृत्रहंता इंद्र ने भुजाओं की शक्ति से निन्यानवे शत्रुपुरियों को तोड़ा एवं मेघ का हनन किया. (२) स न इन्द्रः शिवः सखाश्वावद् गोमद्यवमत्. उरुधारेव दोहते.. (३) वे कल्याणकारी एवं सखा इंद्र बड़ी धाराओं से दूध देने वाली गायों के समान हमारे लिए घोड़ों, गायों एवं जौ से युक्त धन दें. (३) यदद्य कच्च वृत्रहन्नुदगा अभि सूर्य. सर्वं तदिन्द्र ते वशे.. (४) हे वृत्रहंता एवं सूर्यरूपी इंद्र! इस समय विश्व में जो भी पदार्थ हैं, तुम उनके सामने उदित हुए हो एवं सारा विश्व तुम्हारे वश में है. (४) यद्वा प्रवृद्ध सत्पते न मरा इति मन्यसे. उतो तत्सत्यमित्तव.. (५) हे वृद्धिप्राप्त एवं सज्जनपालक इंद्र! तुम अपने को जो मरणरहित मानते हो, वह सत्य है. (५) ये सोमासः परावति ये अर्वावति सुन्विरे. सर्वास्ताँ इन्द्र गच्छसि.. (६) हे इंद्र! समीपवर्ती अथवा दूरवर्ती स्थानों में जो सोमरस निचोड़ा जाता है, तुम उस सबके सामने जाते हो. (६) तमिन्द्रं वाजयामसि महे वृत्राय हन्तवे. स वृषा वृषभो भुवत्.. (७) हम महान् वृत्र राक्षस को मारने के लिए उस इंद्र को बुलाते हैं. अभिलाषापूरक इंद्र हमारे लिए धन बरसावें. (७) इन्द्रः स दामने कृत ओजिष्ठः स मदे हितः. द्युम्नी श्लोकी स सोम्यः.. (८) अतिशय तेजस्वी, सोमरस पीने के लिए निश्चित, यशस्वी, स्तुति योग्य एवं सोम के अधिकारी इंद्र को प्रजापति ने दान करने के लिए बनाया था. (८) गिरा वज्रो न सम्भृतः सबलो अनपच्युतः. ववक्ष ऋष्वो अस्तुतः.. (९) स्तोताओं द्वारा स्तुतियां सुनकर वज्र के समान तीक्ष्ण बनाए गए, बलवान् अपराजित ebook converter DEMO Watermarks*