भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1368, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1368

दीप्तिशाली एवं युद्ध में शत्रुओं से न दबने वाले इंद्र स्तोताओं के लिए धन आदि वहन करने की इच्छा करते हैं. (९) दुर्गे चिन्नः सुगं कृधि गृणान इन्द्र गिर्वणः. त्वं च मघवन् वशः.. (१०) हे स्तुति करने योग्य एवं स्तोताओं द्वारा स्तुत इंद्र! तुम दुर्गम मार्गों को भी हमारे लिए सुगम बनाओ. हे धनस्वामी इंद्र! तुम हमारी कामना करो. (१०) यस्य ते नू चिदादिशं न मिनन्ति स्वराज्याम्. न देवो नाध्रिगुर्जनः.. (११) हे इंद्र! लोग तुम्हारे आदेश और शासन का विरोध न पहले करते थे और न अब करते हैं. देव और युद्ध में शीघ्रतापूर्वक जाने वाले वीर—दोनों ही तुम्हारा विरोध नहीं करते. (११) अधा ते अप्रतिष्कुतं देवी शुष्मं सपर्यतः. उभे सुशिप्र रोदसी.. (१२) हे शोभन-टोप वाले इंद्र! दीप्तियुक्त द्यावा-पृथिवी तुम्हारे अबाध बल की पूजा करती हैं. (१२) त्वमेतदधारयः कृष्णासु रोहिणीषु च. परुष्णीषु रुशत् पयः.. (१३) हे इंद्र! तुम काले और लाल रंग वाली गायों में उज्ज्वल दूध धारण करते हो. (१३) वि यदहेर्ध त्विषो विश्वे देवासो अक्रमुः. विदन्मृगस्य ताँ अमः.. (१४) वृत्र असुर के तेज से डरकर सब देव भाग गए थे. वे वृत्ररूपी पशु से डर गए थे. (१४) आदु मे निवरो भुवद्वृत्रहादिष्ट पौंस्यम्. अजातशत्रुरस्तृतः.. (१५) वृत्रहंता इंद्र ने वृत्र का निवारण किया, अपने बल का प्रयोग किया एवं वे अजातशत्रु बने. (१५) श्रुतं वो वृत्रहन्तमं प्र शर्धं चर्षणीनाम्. आ शुषे राधसे महे.. (१६) हे ऋत्विजो! मैं प्रसिद्ध, सर्वाधिक शत्रुहंता एवं बली इंद्र की स्तुति तुम प्रजाओं को महान् धन दिलाने के लिए करता हूं. (१६) अया धिया च गव्यया पुरुणामन्युरुष्टुत. यत्सोमेसोम आभवः.. (१७) हे अनेक गायों वाले एवं बहुतों द्वारा स्तुत इंद्र! तुम हमारे प्रत्येक सोमरस को पीने के लिए उपस्थित हुए हो. हम गो-अभिलाषिणी बुद्धि वाले होंगे. (१७) बोधिन्मना इदस्तु नो वृत्रहा भूर्यासुतिः. शृणोतु शक्र आशिषम्.. (१८) ebook converter DEMO Watermarks*

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