ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1405, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंउपास्मै गायत नरः पवमानायेन्दवे. अभि देवाँ इयक्षते.. (१) हे ऋत्विजो! यज्ञ करने के लिए देवों के अभिमुख जाने के इच्छुक एवं टपकते हुए सोमरस के लिए गाओ. (१) अभि ते मधुना पयोऽथर्वाणो अशिश्रयुः. देवं देवाय देवयु.. (२) हे सोम! अथर्वा-गोत्रीय ऋषियों ने तुम्हारे दीप्तिशाली एवं देवाभिलाषी रस को इंद्र के लिए मीठे गोदुग्ध से मिलाया है. (२) स नः पवस्व शं गवे शं जनाय शमर्वते. शं राजन्नोषधीभ्यः.. (३) हे दीप्तिशाली सोम! तुम हमारी गायों, संतानों, अश्वों एवं ओषधियों के लिए सुख बरसाओ. (३) बभ्रवे नु स्वतवसेऽरुणाय दिविस्पृशे. सोमाय गाथमर्चत.. (४) हे स्तुतिकर्त्ताओं! तुम लोग पिंगल वर्ण, बलशाली, रक्ताभ एवं द्युलोक को स्पर्श करने वाले सोम की स्तुति करो. (४) हस्तच्युतेभिरद्रिभिः सुतं सोमं पुनीतन. मधावा धावता मधु.. (५) हे ऋत्विजो! अपने पावन प्रसार द्वारा अभिंसुत सोम को पावन बनाओ एवं मादक सोम को गोदुग्ध से मिश्रित करो. (५) नमसेदुप सीदत दध्नेदभि श्रीणीतन. इन्दुमिन्द्रे दधातन.. (६) हे स्तोताओ! नमस्कार करके सोम का सान्निध्य प्राप्त करो एवं उस में दही मिश्रित करके इंद्र के लिए उसे प्रस्तुत करो. (६) अमित्रहा विचर्षणिः पवस्व सोम शं गवे. देवेभ्यो अनुकामकॄत्.. (७) हे सोम! तुम शत्रुधर्षक हो. तुम विचित्र एवं देवों को संतुष्टिकारक हो. तुम हमारी गायों के लिए सरलता से अभिंसुत होओ. (७) इन्द्राय सोम पातवे मदाय परि षिच्यसे. मनश्चिन्मनसस्पतिः.. (८) हे मन के ज्ञाता एवं स्वामी सोम! तुम इंद्र के पीने के लिए एवं नशा करने के लिए पात्रों में भरे जाते हो. (८) पवमान सुवीर्यं रयिं सोम रिरीहि नः. इन्दविन्द्रेण नो युजा.. (९) हे निचुड़ते हुए एवं गीले सोम! तुम इंद्र के साथ मिलकर हमें शोभन बल वाला धन दो. ebook converter DEMO Watermarks*