भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1437, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1437

प्रकाशित करते हुए टपकते हैं. (५) सूक्त—५० देवता—पवमान सोम उत्ते शुष्मास ईरते सिन्धोरूर्मेरिव स्वनः. वाणस्य चोदय पविम्.. (१) हे सोम! तुम्हारा वेग सागर की लहरों के समान चलता है. तुम धनुष से छोड़े हुए बाण के समान शब्द करो. (१) प्रसवे त उदीरते तिस्रो वाचो मखस्युवः. यदव्य एषि सानवि.. (२) हे सोम! तुम जिस समय उन्नत एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हो, तब तुम्हारी उत्पत्ति के समय यज्ञ करने के अभिलाषी यजमान के मुख से ऋक्, यजु एवं साम के रूप में तीन वचन निकलते हैं. (२) अव्यो वारे परि प्रियं हरिं हिन्वन्त्यद्रिभिः. पवमानं मधुश्चुतम्.. (३) देवों के प्रिय, हरे रंग वाले, पत्थरों की सहायता से पीसे गए, रस टपकाने वाले एवं निचुड़ते हुए सोम को ऋत्विज् भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर रखते हैं. (३) आ पवस्व मदिन्तम पवित्रं धारया कवे. अर्कस्य योनिमासदम्.. (४) हे अतिशय नशीले एवं क्रांत-कर्म वाले सोम! तुम पूजा के योग्य इंद्र का स्थान पाने के लिए धारा के रूप में दशापवित्र पर गिरो. (४) स पवस्व मदिन्तम गोभिरञ्जानो अक्तुभिः. इन्द्विन्द्राय पीतये.. (५) हे अतिशय मादक सोम! तुम स्वादिष्ट बनाने वाले गाय के दूध, घी आदि से मिलकर इंद्र के पीने के लिए टपको. (५) सूक्त—५१ देवता—पवमान सोम अध्वर्यो अद्रिभिः सुतं सोमं पवित्र आ सृज. पुनीहीन्द्राय पातवे.. (१) हे अध्वर्युगण! पत्थरों की सहायता से पीसे हुए सोम को दशापवित्र पर डालो. तुम इसे इंद्र के पीने के लिए शुद्ध करो. (१) दिवः पीयूषमुत्तमं सोममिन्द्राय वज्रिणे. सुनोता मधुमत्तमम्.. (२) हे अध्वर्युगण! अत्यधिक मधुर, स्वर्ग के अमृत के समान एवं उत्तम सोम को वज्रधारी ebook converter DEMO Watermarks*

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 1437, कुल 1855 में से · BharatKosha