भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1438, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1438

इंद्र के लिए निचोड़ो. (२) तव त्य इन्दो अन्धसो देवा मधोर्व्यश्नते. पवमानस्य मरुतः.. (३) हे सोम तुम्हारे निचुड़ते हुए एवं नशीले रस को इंद्रादि देव एवं मरुत् प्राप्त करते हैं. (३) त्वं हि सोम वर्धयन्त्सुतो मदाय भूर्णये. वृषन्त्स्तोतारमूतये.. (४) हे निचुड़े हुए सोम! तुम देवों को उन्नत बनाते हुए एवं अभिलाषाओं की पूर्ति करते हुए तुरंत नशा देने एवं रक्षा करने के लिए स्तोता के पास जाते हो. (४) अभ्यर्ष विचक्षण पवित्रं धारया सुतः. अभि वाजमुत श्रवः.. (५) हे विशेष बुद्धिमान् सोम! तुम निचुड़कर दशापवित्र की ओर धारा के रूप में पहुंचो एवं हमारे लिए अन्न एवं कीर्ति दो. (५) सूक्त—५२ देवता—पवमान सोम परि द्युक्षः सनद्रयिर्भर्द्वाजं नो अन्धसा. सुवानो अर्ष पवित्र आ.. (१) दीप्तिशाली एवं धन देने वाले सोम अन्न के साथ हमारे बल को बढ़ावें. हे सोम! तुम निचुड़ कर दशापवित्र पर गिरो. (१) तव प्रत्नेभिरध्वभिर्वरव्यो वारे परि प्रियः. सहस्रधारो यात्तना.. (२) हे सोम! तुम्हारा देवों को प्रसन्न करने वाला, हजारों धाराओं वाला रस प्राचीन मार्गों की सहायता से भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाता है. (२) चरुर्न यस्तमीङ्खयेन्दो न दानमीङ्खय. वधैर्वधस्नवीङ्खय.. (३) हे सोम हमें चरु के समान पूर्ण भोजन दो. हे दीप्तिशाली सोम! हमें देने योग्य वस्तु दो. हे चोट खाकर बहने वाले सोम! तुम पत्थरों के प्रहरों से रस टपकाओ. (३) नि शुष्ममिन्दवेषां पुरुहूत जनानाम्. यो अस्माँ आदिदेशति.. (४) हे बहुतों द्वारा बुलाए गए सोम! जिन शत्रुओं का बल हमें बाधा के लिए ललकारता है, उनका बल नष्ट करो. (४) शतं न इन्द ऊतिभिः सहस्रं वा शुचीनाम्. पवस्व मंहयद्रयिः.. (५) हे धन देने वाले सोम! तुम हमारी रक्षा करने के लिए सैकड़ों हजारों निर्मल धाराओं में बहो. (५) ebook converter DEMO Watermarks*