भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1449, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1449

निचोड़े हुए, द्रोणकलश की ओर जाते हुए तथा हमारे लिए सब संपत्तियां देते हुए सोम यज्ञभूमि में इस प्रकार भयरहित होकर ठहरते हैं, जैसे शत्रु से जीते हुए पशुओं में शूर ठहरता है. (१९) आ त इन्दो मदाय क पयो दुहन्त्यायवः. देवा देवेभ्यो मधु.. (२०) हे सोम! स्तोतागण तुम्हारा मधुर रस देवों के मद के निमित्त दुहते हैं. (२०) आ नः सोमं पवित्र आ सृजता मधुमत्तमम्. देवेभ्यो देवश्रुत्तमम्.. (२१) हे ऋत्विजो! देवों के अत्यंत प्रिय व अत्यधिक मधुर हमारे सोम को इंद्रादि देवों के लिए दशापवित्र पर शुद्ध करो. (२१) एते सोमा असृक्षत गृणानाः श्रवसे महे. मदिन्तमस्य धारया.. (२२) सुत किए जाते हुए ये सोम ऋत्विजों द्वारा महान् अन्न पाने के लिए अत्यंत नशीली धारा को बनाते हैं. (२२) अभि गव्यानि वीतये नृम्णा पुनानो अर्षसि. सनद्वाजः परि स्रव.. (२३) हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम भक्षण योग्य बनने के लिए गायों के दूध आदि से मिलते हो. तुम हमें अन्न देते हुए टपको. (२३) उत नो गोमतीरिषो विश्वा अर्ष परिष्टुभः. गृणानो जमदग्निना.. (२४) हे सोम! तुम मुझ जमदग्नि की स्तुति सुनकर मुझे गायों से युक्त एवं सभी जगह प्रशंसित अन्न दो. (२४) पवस्व वाचो अग्रियः सोम चित्राभिरूतिभिः. अभि विश्वानि काव्या.. (२५) हे प्रमुख सोम! तुम हमारी स्तुतियां सुनकर पूज्य रक्षासाधनों के साथ बरसो एवं हमारे स्तुतिवाक्यों के अनुसार फल दो. (२५) त्वं समुद्रिया अपोऽग्रियो वाच ईरयन्. पवस्व विश्वमेजय.. (२६) हे विश्व को कंपाने वाले एवं प्रमुख सोम! तुम हमारे स्तुतिवचनों को प्रेरित करते हुए अंतरिक्ष से जलवर्षा करो. (२६) तुभ्येमा भुवना कवे महिम्ने सोम तस्थिरे. तुभ्यमर्षन्ति सिन्धवः.. (२७) हे क्रांत कर्म वाले सोम! तुम्हारी महिमा से ही ये लोक स्थित हैं एवं नदियां तुम्हारी ही आज्ञा का पालन करती हैं. (२७) ebook converter DEMO Watermarks*