ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1450, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्र ते दिवो न वृष्टयो धारा यन्त्यसश्चतः. अभि शुक्रामुपस्तिरम्.. (२८) हे सोम! तुम्हारी अलग-अलग धाराएं आकाश से गिरने वाली वर्षा के समान सफेद रंग के भेड़ के बालों से बने दशापवित्र की ओर जाती हैं. (२८) इन्द्रायेन्दुं पुनीतनोग्रं दक्षाय साधनम्. ईशानं वीतिराधसम्.. (२९) हे ऋत्विजो! उग्र, बल के साधक, धनों के स्वामी एवं धन देने वाले सोम को इंद्र के लिए शुद्ध करो. (२९) पवमान ऋतः कविः सोमः पवित्रमासदत्. दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम्.. (३०) सच्चे, क्रांतकर्म वाले एवं शुद्ध होते हुए सोम हमारी स्तुति सुनकर उत्तम शक्ति धारण करते हुए दशापवित्र पर बैठते हैं. (३०) सूक्त—६३ देवता—पवमान सोम आ पवस्व सहस्रिणं रयिं सोम सुवीर्यम्. अस्मे श्रवांसि धारय.. (१) हे सोम! हमारे लिए अधिक संख्या वाला एवं शोभन शक्ति से युक्त धन बरसाओ तथा हमें अन्न दो. (१) इषमूर्जं च पिन्वस इन्द्राय मत्सरिन्तमः. चमूष्वा नि षीदसि.. (२) हे अतिशय मादक सोम! तुम इंद्र के लिए अन्न एवं रस टपकाते हो तथा चमस नामक पात्रों में बैठे हो. (२) सुत इन्द्राय विष्णवे सोमः कलशे अक्षरत्. मधुमाँ अस्तु वायवे.. (३) इंद्र, विष्णु एवं वायु के लिए निचोड़े गए सोम द्रोणकलश में गिरते हैं एवं मधुर रस वाले हैं. (३) एते असृग्रमाशवोऽति ह्वरांसि बभ्रवः. सोमा ऋतस्य धारया.. (४) पीले रंग वाले व शीघ्र गतियुक्त ये सोम जल की धारा से निर्मित होते हैं एवं राक्षसों पर धावा बोलते हैं. (४) इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम्. अपघ्नन्तो अराव्णः.. (५) सोम इंद्र को बढ़ाते हुए, उदक को प्रेरित करने वाले, हमारे काम के लिए सभी रसों को भला बनाते हुए एवं दान न देने वालों का नाश करते हुए जाते हैं. (५) ebook converter DEMO Watermarks*