ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1466, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे सर्वत्र चमकने वाले पूषा! तुम्हारे लिए निचोड़ा गया यह सोम तुम्हें शुद्ध घी के समान प्राप्त होता है. तुम हमें कमनीय नारियां दो. (१२) वाचो जन्तुः कवीनां पवस्व सोम धारया. देवेषु रत्नधा असि.. (१३) हे स्तोताओं के वचनों के जन्मदाता सोम! तुम धारा के रूप में द्रोणकलश में गिरो. तुम यज्ञकर्ताओं को रत्न देने वाले हो. (१३) आ कलशेषु धावति श्येनो वर्म वि गाहते. अभि द्रोणा कनिक्रदत्.. (१४) जैसे बाज पक्षी शब्द करता हुआ अपने घोंसले में जाता है, उसी प्रकार छनते हुए सोम शब्द करके द्रोणकलश में जाते हैं. (१४) परि प्र सोम ते रसोऽसर्चि कलशे सुतः. श्येनो न तक्तो अर्षति.. (१५) हे सोम! तुम्हारा रस द्रोणकलश में छनकर चमस आदि पात्रों में विभक्त होता है तथा बाज पक्षी के समान शीघ्रता से इंद्र के पास जाता है. (१५) पवस्व सोम मन्दयन्निन्द्राय मधुमत्तमः.. (१६) हे अतिशय मधुर रस वाले एवं मादक सोम! तुम इंद्र के लिए आओ. (१६) असृग्रन्देववीतये वाजयन्तो रथा इव.. (१७) जिस प्रकार शत्रुधनों के इच्छुक लोग रथ भेजते हैं, उसी प्रकार ऋत्विजों ने अन्न वाले सोम को देवों के लिए दिया है. (१७) ते सुतासो मदिन्तमाः शुक्रा वायुमसृक्षत.. (१८) अत्यंत मादक एवं दीप्तिशाली सोम ने वायु को बनाया है. (१८) ग्राव्णा तुन्नो अभिष्टुतः पवित्रं सोम गच्छसि. दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम्.. (१९) हे सोम! तुम पत्थरों से मर्दित होकर एवं स्तोता को शोभन धनादि देकर दशापवित्र की ओर प्रयाण करते हो. (१९) एष तुन्नो अभिष्टुतः पवित्रमति गाहते. रक्षोहा वारमव्ययम्.. (२०) हे सोम! तुम पत्थरों से कुचले हुए एवं स्तोताओं द्वारा प्रशंसित होकर राक्षसों का हनन कर दो एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को लांघकर द्रोणकलश में आओ. (२०) यदन्ति यच्च दूरके भयं विन्दति मामिह. पवमान वि तज्जहि.. (२१) ebook converter DEMO Watermarks*