भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1467

हे पवमान सोम! जो भय समीप, दूर अथवा इस स्थान में है, उसे भली प्रकार नष्ट करो. (२१) पवमानः सो अद्य नः पवित्रेण विचर्षणिः. यः पोता स पुनातु नः.. (२२) वे सबके द्रष्टा, पवित्र होते हुए एवं दशापवित्र से छने हुए सोम हमें पापरहित करें. (२२) यत्ते पवित्रमर्चिष्यग्ने विततमन्तरा. ब्रह्म तेन पुनीहि नः.. (२३) हे पवित्र करने वाले अग्नि! तुम्हारा जो शुद्ध करने वाला तेज किरणों के बीच वर्तमान है, उसके द्वारा हमारे पुत्रादि बढ़ाने वाले शरीर को पापरहित करो. (२३) यत्ते पवित्रमर्चिवदग्ने तेन पुनीहि नः. ब्रह्मसवैः पुनीहि नः.. (२४) हे अग्नि! तुम्हारा जो शोभनकिरणों वाला तेज है, अपने उसी तेज से हमें पापरहित करो तथा सोमरस निचोड़ने की क्रियाओं से हमें पवित्र करो. (२४) उभाभ्यां देव सवितः पवित्रेण सवेन च. मां पुनीहि विश्वतः.. (२५) हे सबके प्रेरक एवं दीप्तिशाली सोम! तुम अपने पवित्र तेज एवं निचुड़ने की क्रिया— इन दोनों से मुझे सभी प्रकार पापरहित करो. (२५) त्रिभिष्ट्वं देव सवितर्वर्षिष्ठैः सोम धामभिः. अग्ने दक्षैः पुनीहि नः.. (२६) हे सबके प्रेरक, दीप्तिशाली एवं पवित्र करने के गुण से युक्त अग्नि! तुम अपने बढ़े हुए एवं सामर्थ्य वाले तीन तेजों द्वारा हमें पापरहित करो. (२६) पुनन्तु मां देवजनाः पुनन्तु वसवो धिया. विश्वे देवाः पुनीत मा जातवेदः पुनीहि मा.. (२७) यजमान मुझे पापरहित करें. वसुदाता, जातवेद, दिव्यजन और समस्त देव अपने कर्मों से मुझे पापरहित करें. (२७) प्र प्यायस्व प्र स्यन्दस्व सोम विश्वेभिरंशुभिः. देवेभ्य उत्तमं हविः.. (२८) हे सोम! हमें भली प्रकार बढ़ाओ एवं अपनी सभी किरणों द्वारा देवों के निमित्त अति प्रशंसनीय द्रव कलशों में डालो. (२८) उप प्रियं पनिप्रतं युवानमाहुतीवृधम्. अगन्म बिभ्रतो नमः.. (२९) हम सबको प्रसन्न करने वाले, अधिक शब्दकारी, तरुण, आहुतियों द्वारा बढ़ने वाले सोम के समीप नमस्कार करते हुए जाते हैं. (२९) ebook converter DEMO Watermarks*