ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1468, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअलाय्यस्य परशुर्नाश तमा पवस्व देव सोम. आखुं चिदेव देव सोम.. (३०) आक्रमणकारी शत्रु का फरसा उसी का नाश करे. हे दीप्तिशाली सोम! तुम हमारे सामने आओ एवं सबका हनन करने वाले शत्रु को मारो. (३०) यः पावमानीरध्येत्यृषिभिः सम्भृतं रसम्. सर्वं स पूतमश्नाति स्वदितं मातरिश्वना.. (३१) जो व्यक्ति ऋषियों द्वारा पवमान सोमदेव के विषय में निर्मित वेदमंत्ररूपी रस को पढ़ता है, वह वायु द्वारा पवित्र सभी प्रकार का अन्न खाता है. (३१) पावमानीर्यो अध्येत्यृषिभिः सम्भृतं रसम्. तस्मै सरस्वती दुहे क्षीरं सर्पिर्मधूदकम्.. (३२) जो ब्राह्मण ऋषियों द्वारा पवमान सोमदेव के विषय में निर्मित वेदमंत्ररूपी रस का अध्ययन करता है, उसके लिए सरस्वती दूध एवं मादक सोम दुहती हैं. (३२) सूक्त—६८ देवता—पवमान सोम प्र देवमच्छा मधुमन्त इन्दवोऽसिष्यदन्त गाव आ न धेनवः. बर्हिषदो वचनावन्त ऊधभिः परिस्रुतमुसिया निर्णिजं धिरे.. (१) नशीले सोम दुधारू गायों के समान इंद्र के लिए रस टपकाते हैं. रंभाती हुई एवं कुशों पर बैठी हुई दुधारू गाएं अपने थनों से टपकने वाले सोमरस को दूध के रूप में धारण करती हैं. (१) स रोरुवदभि पूर्वा अचिक्रददुपारुहः श्रथयन्त्स्वादते हरिः. तिरः पवित्रं परियन्नुरु ज्ययो नि शर्याणि दधते देव आ वरम्.. (२) शब्द करके कलश की ओर जाते हुए, स्तोताओं की स्तुतियों को सामने सुनते हुए हरे रंग के सोम ओषधियों को फलयुक्त बनाते हैं, दशापवित्र को पार करके तेजी से बहते हैं, राक्षसों को मारते और यजमानों को वरण करने योग्य धन देते हैं. (२) वि यो ममे यम्या संयती मदः साकंवृधा पयसा पिन्वदक्षिता. मही अपारे रजसी विवेविद्ददभिव्रजन्नक्षितं पाज आ ददे.. (३) नशीले सोम ने परस्पर मिली हुई द्यावा-पृथिवी को बनाया है. उन एक साथ बढ़ने वाली एवं नाशरहित द्यावा-पृथिवी को सोम ने अपने रस से सींचा है. सोम ने विशाल एवं सीमारहित द्यावा-पृथिवी को सबको ज्ञात कराके सब ओर गति वाला एवं नाशरहित बल प्राप्त किया. (३) ebook converter DEMO Watermarks*