ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1480, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयोग्य होता है. हमारे यज्ञ में आने वाले इंद्र का मार्ग विस्तृत होता है. वे धरती पर गिरने वाली वर्षा के स्वामी हैं. दुधारू गायों के हितकारक, जल बरसाने वाले एवं यज्ञ के नेता इंद्र हमारे यज्ञ में जाने से स्तुतियोग्य होते हैं. (३) आत्मन्वन्नभो दुह्यते घृतं पय ऋतस्य नाभिरमृतं वि जायते. समीचीनाः सुदानवः प्रीणन्ति तं नरो हितमव मेहन्ति पेरवः.. (४) सोम आदित्यरूप आकाश से सारपूर्ण घी व दूध दुहते हैं. यज्ञ की नाभिरूप सोम से अमृत उत्पन्न होता है. शोभनदान वाले यजमान मिलकर सोम को प्रसन्न करते हैं. यज्ञ का नेतृत्व करने वाली एवं सबकी रक्षक सोमकिरणें धरती पर जल बरसाती हैं. (४) अरावीदंशुः सचमान ऊर्मिणा देवाव्यं१ मनुषे पिन्वति त्वचम्. दधाति गर्भमदितेरुपस्थ आ येन तोकं च तनयं च धामहे.. (५) जलसमूह में मिलाए जाते हुए सोम शब्द करते हैं एवं देवों का पालन करने वाले अपने शरीर को यजमान के कल्याण के लिए पात्रों में गिराते हैं. सोम अपनी किरणों द्वारा धरती पर उत्पन्न ओषधियों में गर्भधारण करते हैं. उसी गर्भ की सहायता से हम पुत्र और पौत्र पाते हैं. (५) सहस्रधारेऽव ता असश्चतस्तृतीये सन्तु रजसि प्रजावतीः. चतस्रो नाभो निहिता अवो दिवो हविर्भरन्तमृतं घृतश्चुतः.. (६) जल की अनेक धाराओं वाले स्वर्गलोक में वर्तमान, एक-दूसरे से मिली हुई एवं प्रजाओं को उत्पन्न करने वाली सोमकिरणें धरती पर गिरें. सोम ने उन चार किरणों को स्वर्ग के नीचे स्थापित किया है. जल बरसाने वाली वे किरणें देवों को हवि देती हैं एवं ओषधियों में अमृत भरती हैं. (६) श्वेतं रूपं कृणुते यत्सिषासति सोमो मीढवाँ असुरो वेद भूमनः. धिया शमी सचते सेमभि प्रवद्विवस्कवन्धमव दर्षदद्रिणम्.. (७) पात्र में पहुंचकर सोम पात्र का रूप उज्ज्वल कर देते हैं. अभिलाषापूरक एवं शक्तिशाली सोम स्तोताओं को बहुत धन देना जानते हैं, अपनी बुद्धि की सहायता से उत्तम कर्मों को प्राप्त करते हैं एवं आकाश में घिरे हुए जलपूर्ण मेघ को फाड़ते हैं. (७) अध श्वेतं कलशं गोभिरक्तं कार्ष्मन्ना वाज्यक्रमीतसस्वान्. आ हिन्विरे मनसा देवयन्तः कक्षीवते शतहिमाय गोनाम्.. (८) जिस प्रकार युद्ध में योद्धा से प्रेरित घोड़ा मनचाही दिशा को लांघ जाता है, उसी प्रकार सोम सफेद रंग वाले एवं जलपूर्ण कलश को लांघते हैं. देवों की कामना करने वाले ऋत्विज् सोम की स्तुतियां करते हैं. सोम ने अधिक चलने वाले कक्षीवान् ऋषि को पशु दिए थे. (८) ebook converter DEMO Watermarks*