ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1493, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअत्यो न हियानो अभि वाजमर्ष स्वर्विस्कोशं दिवो अद्रिमातरम्. वृषा पवित्रे अधि सानो अव्यये सोमः पुनान इन्द्रियाय धायसे.. (३) हे सोम! तुम प्रेरित अश्व के समान संग्राम में जाओ. हे सब जानने वाले सोम! तुम द्युलोक से जल के निर्माता द्रोणकलश के पास जाओ. वर्षा करने वाले सोम के धारणकर्त्ता इंद्र के लिए भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर शुद्ध होते हैं. दशापवित्र पर्वत की चोटी के समान ऊंचा है. (३) प्र त आश्विनीः पवमान धीजुवो दिव्या असृग्रन्पयसा धरीमणि. प्रान्तर्ऋषयः स्थाविरीरसृक्षत ये त्वा मृजन्त्यृषिषाण वेधसः.. (४) हे पवमान सोम! तुम्हारी फैलने वाली, मन के समान वेग वाली, दिव्य एवं दूध से युक्त धाराएं द्रोणकलश में गिरती हैं. हे ऋषियों द्वारा सेवित सोम! तुम्हारा निर्माण करने वाले ऋषि तुम्हारी धाराएं द्रोणकलश के मध्य में कर देते हैं. (४) विश्वा धामानि विश्वचक्ष ऋभ्वसः प्रभोस्ते सतः परि यन्ति केतवः. व्यानशिः पवसे सोम धर्मभिः पतिर्विश्वस्य भुवनस्य राजसि.. (५) हे सबको देखने वाले प्रभु सोम! तुम्हारी विस्तृत किरणें सभी तेजों को प्रकाशित करती हैं. हे व्यापक सोम! तुम रस-धाराओं के रूप में निचुड़ते हो एवं सकल भुवन के स्वामी के रूप में सुशोभित होते हो. (५) उभयतः पवमानस्य रश्मयो ध्रुवस्य सतः परि यन्ति केतवः. यदी पवित्रे अधि मृज्यते हरिः सत्ता नि योना कलशेषु सीदति.. (६) शुद्ध होते हुए, निश्चल एवं वर्तमान सोम का ज्ञान कराने वाली किरणें इधर-उधर चलती हैं. हरे रंग वाले एवं स्थित रहने वाले सोम जब दशापवित्र पर छाने जाते हैं, तब द्रोणकलश में रुकते हैं. (६) यज्ञस्य केतुः पवते स्वध्वरः सोमो देवानामुप याति निष्कृतम्. सहस्रधारः परि कोशमर्षति वृषा पवित्रमत्येति रोरुवत्.. (७) यज्ञ का ज्ञान कराने वाले एवं शोभन यज्ञ वाले सोम निचोड़े जाते हैं. वे सोम देवों के विशुद्ध स्थान को जाते हैं, हजार धाराओं वाले बनकर द्रोणकलश में पहुंचते हैं एवं सींचने वाले सोम शब्द करते हुए दशापवित्र को पार करके नीचे जाते हैं. (७) राजा समुद्रं नद्यो३ वि गाहतेऽपामूर्मिं सचते सिन्धुषु श्रितः. अध्यस्थात्सानु पवमानो अव्ययं नाभा पृथिव्या धरुणो महो दिवः.. (८) राजा सोम अंतरिक्ष एवं वहां स्थित जल में मिलते हैं तथा जल नीचे बरसाते हैं. जल में ebook converter DEMO Watermarks*