भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1497, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1497

प्रेरित करते हैं. (२५) इन्दुः पुनानो अति गाहते मृधो विश्वानि कृण्वन्त्सुपथानि यज्यवे. गाः कृण्वानो निर्णिजं हर्यतः कविरत्यो न क्रीळन्परि वारमर्षति.. (२६) दीप्तिशाली सोम पवित्र होते समय यजमान के कल्याण के लिए सभी मार्ग सुगम बनाते हुए शत्रुओं को हराकर कलश में जाते हैं. सुंदर एवं मेधावी सोम अश्व के समान क्रीड़ा करते हुए एवं अपना रूप गोदुग्ध के समान बनाते हुए भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हैं. (२६) अस्रश्वतः शतधारा अभिश्रियो हरिं नवन्तेऽव ता उदन्युवः. क्षिपो मृजन्ति परि गोभिरावृतं तृतीये पृष्ठे अधि रोचने दिवः.. (२७) आपस में मिली हुई, सौ धाराओं वाली व सोम का सहारा लेने वाली सूर्यकिरणें हरे रंग के सोम को प्राप्त करती हैं. उंगलियां किरणों से ढके हुए सोम एवं द्युलोक के दीप्त स्थान पर स्थित सोम को मसलती हैं. (२७) तवेमाः प्रजा दिव्यस्य रेतसस्त्वं विश्वस्य भुवनस्य राजसि. अथेद् विश्वं पवमान ते वशे त्वमिन्दो प्रथमो धामधा असि.. (२८) हे सोम! तुम्हारे दीप्त वीर्य से ये सब प्रजाएं उत्पन्न हुई हैं. तुम सारे संसार के स्वामी हो. यह सारा विश्व तुम्हारे वश में है. तुम सबसे प्रमुख एवं तेजधारी हो. (२८) त्वं समुद्रो असि विश्ववित्कवे तवेमाः पञ्च प्रदिशो विधर्मणि. त्वं द्यां च पृथिवीं चाति जभ्रिषे तव ज्योतींषि पवमान सूर्यः.. (२९) हे मेधावी सोम! तुम जलवर्षा के साधन एवं विश्व को जानने वाले हो. ये पांचों दिशाएं तुम्हें ही आधार बनाती हैं. तुम द्युलोक एवं पृथ्वी को धारण करते हो एवं सूर्य तुम्हारी ज्योति को विस्तृत करता है. (२९) त्वं पवित्रे रजसो विधर्मणि देवेभ्यः सोम पवमान पूयसे. त्वामुशिजः प्रथमा अगृभ्णत तुभ्येमा विश्वा भुवनानि येमिरे.. (३०) हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम देवों के निमित्त रस धारण करने वाले दशापवित्र पर निचोड़े जाते हो. अभिलाषा करने वाले प्रमुख पुरोहित तुम्हें ग्रहण करते हैं. सारे प्राणी तुम्हारे लिए अपने-आपको अर्पित करते हैं. (३०) प्र रेभ एत्यति वारमव्ययं वृषा वनेष्वव चक्रदद्धरिः. सं धीतयो वावशाना अनूषत शिशुं रिहन्ति मतयः पनिप्रतम्.. (३१) ebook converter DEMO Watermarks*