भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1509, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1509

हैं. सोम तेज चलने वाले घोड़े के समान द्रोणकलश में जाते हैं. (१) सं मातृभिर्न शिशुर्वावशानो वृषा दधन्वे पुरुवारो अद्भिः. मर्यो न योषामभि निष्कृतं यन्त्सं गच्छते कलश उसियाभिः.. (२) जैसे माताएं बच्चे को धारण करती हैं, उसी प्रकार देवों की अभिलाषा करने वाले, अभिलाषापूरक एवं बहुतों द्वारा वरण करने योग्य सोम जल द्वारा धारण किए जाते हैं. पुरुष जिस प्रकार नारी के पास जाता है, उसी प्रकार सोम अपने संस्कृत स्थान में जाते हुए द्रोणकलश में गाय के दूध-दही आदि से मिलते हैं. (२) उत प्र पिप्य ऊधरघ्न्याया इन्दुर्घाराभिः सचते सुमेधाः. मूर्धानं गावः पयसा चमूष्वभि श्रीणन्ति वसुभिर्न निक्तैः.. (३) सोम गाय के थनों को दूध से भरते हैं. शोभन बुद्धि वाले सोम धाराओं के रूप में नीचे गिरते हैं. जिस प्रकार धुले हुए कपड़े से कोई वस्तु ढक दी जाती है, उसी प्रकार गाएं अपने श्वेत दूध से चमू नामक पात्र में रखे हुए सोम को ढकती हैं. (३) स नो देवेभिः पवमान रदेन्दो रयिमश्विनं वावशानः. रथिरायतामुशती पुरन्धिरस्मद्र्य१शा दावने वसूनाम्.. (४) हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम देवों के साथ मिलकर हमें धन दो. हे सोम! तुम देवों की अभिलाषा करते हुए हमें अश्व वाला धन दो. हम रथस्वामी लोगों की अभिलाषा करने वाली सोम की बुद्धि अनेक प्रकार का धन देने के लिए हमारे सामने आवे. (४) नू नो रयिमुप मास्व नृवन्तं पुनानो वाताप्यं विश्वश्चन्द्रम्. प्र वन्दितुरिन्दो तार्यायुः प्रातर्मक्षू धियावसुर्जगम्यात्.. (५) हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमारे लिए शीघ्र संतानयुक्त धन दो, जल को सबका आनंददाता बनाओ व स्तोता की आस्था बढ़ाओ. हे बुद्धि द्वारा धन प्राप्त करने वाले सोम! जल्दी हमारे यज्ञ की ओर आओ. (५) सूक्त—९४ देवता—पवमान सोम अधि यदस्मिन्वाजिनीव शुभः स्पर्धन्ते धियः सूर्ये न विशः. अपो वृणानः पवते कवीयन्व्रजं न पशुवर्धनाय मन्म.. (१) जिस समय सोम को घोड़े के समान सजाया जाता है एवं सोम की किरणें सूर्य की किरणों के समान उत्पन्न होती हैं, उस समय उंगलियां परस्पर होड़ लगाकर सोम का रस निचोड़ती हैं. स्तोताओं की इच्छा करने वाले सोम जलों को ढकते हुए इस प्रकार पात्र में ebook converter DEMO Watermarks*