ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1511, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसाथ स्तुतियां अर्पित करो. (१) हरिः सृजानः पथ्यामृतस्येयर्ति वाचमरितेव नावम्. देवो देवानां गुह्यानि नामाविष्कृणोति बर्हिषि प्रवाचे.. (२) मल्लाह जिस प्रकार नाव को आगे बढ़ाता है, उसी प्रकार निर्मित होते हुए एवं हरे रंग वाले सोम यज्ञ की उपयोगी वाणी को प्रेरित करते हैं. दीप्तिशाली सोम यज्ञ में स्तोता के सामने देवों के छिपे हुए रूप को प्रकट करते हैं. (२) अपामिवेोर्मयस्तर्तुराणाः प्र मनीषा ईरते सोममच्छ. नमस्यन्तीरुप च यन्ति सं चा च विशन्त्युशतीरुशन्तम्.. (३) जैसे पानी की लहरें जल्दी उठती हैं, उसी प्रकार देव स्तुति के लिए शीघ्रता करने वाले स्तोता के मन की स्वामिनी स्तुतियों को सोम की ओर भेजते हैं. सोम को नमस्कार करने वाली स्तुतियां सोम के पास जाती हैं. अभिलाषा करने वाली स्तुतियां अभिलाषा वाले सोम में प्रविष्ट होती हैं. (३) तं मर्मृजानं महिषं न सानावंशुं दुहन्त्युक्षणं गिरिष्ठाम्. तं वावशानं मतयः सचन्ते त्रितो बिभर्ति वरुणं समुद्रे.. (४) ऋत्विज् मसले जाते हुए, भैंसे के समान ऊंचे स्थान पर स्थित, अभिलाषापूरक एवं निचुड़ने के लिए पत्थरों के बीच में रखे हुए सोम को दुहते हैं. स्तुतियां अभिलाषा करने वाले सोम की सेवा करती हैं. तीन स्थानों में स्थित इंद्र शत्रुनिवारक सोम को शत्रुवध के लिए अंतरिक्ष में धारण करते हैं. (४) इषन्वाचमुपवक्तेव होतुः पुनान इन्दो वि ष्या मनीषाम्. इन्द्रश्च यत्क्षयथः सौभगाय सुवीर्यस्य पतयः स्याम.. (५) हे सोम! अध्वर्यु जिस प्रकार होता को प्रोत्साहित करता है, उसी प्रकार तुम शुद्ध होते हुए अपनी बुद्धि को उन्हें धन देने की ओर लगाओ. जब तुम और सोम यज्ञ में साथ-साथ रहो, तब हम सौभाग्य वाले हों एवं शोभन संतान वाले धन के अधिपति हों. (५) सूक्त—९६ देवता—पवमान सोम प्र सेनानीः शूरो अग्रे रथानां गव्यन्नेति हर्षते अस्य सेना. भद्रान्कृण्वन्निन्द्रहवान्त्सखिभ्य आ सोमो वस्त्रा रभसानि दत्ते.. (१) सेनापति एवं शूर सोम शत्रुओं की गाएं पाने की इच्छा करते हुए युद्ध में रथों के आगे जाते हैं. इससे सोम की सेना प्रसन्न होती है. सोम इंद्र के आहवानों को अपने मित्र यजमानों ebook converter DEMO Watermarks*