ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1525, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे सोम! हमारे लिए तुम धारण करने योग्य वस्त्र लाओ. तुम शुद्ध होकर हमारे लिए दुधारू गाएं लाओ. तुम हमारे भरणपोषण के लिए आह्लादक सोना तथा रथ में जुड़ने वाले घोड़े दो. (५०) अभी नो अर्ष दिव्या वसून्याभि विश्वा पार्थिवा पूयमान:. अभि येन द्रविणमश्श्रवामाभ्यार्षेयं जमदग्निवन्नः.. (५१) हे दशापवित्र द्वारा शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमें दिव्य एवं पार्थिव सभी प्रकार के धन दो. हम तुम्हारे द्वारा दी हुई शक्ति से धन का उपभोग करें. हम जमदग्नि ऋषि के समान धन पाने में समर्थ हों. (५१) अया पवा पवस्वैना वसूनि माँश्चत्व इन्दो सरसि प्र धन्व. ब्रध्नश्चिद्रत्र वातो न जूतः पुरुमेधश्चित्तकवे नरं दात्.. (५२) हे सोम! इस शुद्ध होती हुई सोमधारा के द्वारा सभी धन बरसाओ. हे सोम! जो लोग तुम्हें मानते हैं, उनके जल में जाओ. सोम के शुद्ध होने की वेला में सबका ज्ञान कराने वाले एवं वायु के समान वेग वाले आदित्य तथा अनेक यज्ञों वाले इंद्र भी उनके पास जाते हैं. हे सोम! मुझ स्तुतिकर्त्ता को आदित्य और इंद्र पुत्र दें. (५२) उत न एना पवया पवस्वाधि श्रुते श्रवाय्यस्य तीर्थे. षष्टिं सहस्रा नैगुतो वसूनि वृक्षं न पक्वं धूनवद्रणाय.. (५३) हे सबके आश्रय योग्य सोम! हमारे शब्दतीर्थरूपी प्रसिद्ध यज्ञ में इस पवित्र धारा के द्वारा टपको. जिस प्रकार वृक्ष पका हुआ फल गिराता है, उसी प्रकार शत्रुनाशक सोम ने शत्रुविजय के लिए हमें साठ हजार धन दिए. (५३) महीमे अस्य वृषनाम शूषे माँश्चत्वे वा पृशने वा वधत्रे. अस्वापयन्निगुतः स्नेहयच्चापामित्राँ अपाचितो अचेतः.. (५४) घोड़ों एवं बाहुओं द्वारा किए जाने वाले युद्ध में सोम के दो महान् कर्म बाण बरसाना और शत्रुओं को हराना शत्रुनाशक होते हैं. इन दोनों कार्यों द्वारा सोम ने शत्रु का वध किया एवं युद्धभूमि से भगाया. हे सोम! शत्रुओं और अग्नि चयन करने वालों को दूर भगाओ. (५४) सं त्री पवित्रा विततान्येष्वन्वेकं धावसि पूयमानः. असि भगो असि दात्रस्य दातासि मघवा मघवद्भ्य इन्दो.. (५५) हे सोम! तुम तीन विस्तृत पवित्रों को भली प्रकार प्राप्त करते हो. तुम शुद्ध होते हुए भेड़ के बालों से बने दशापवित्र की ओर दौड़ते हो. हे सोम! तुम भोगयोग्य, देने योग्य धन के दाता एवं धनवानों की अपेक्षा अधिक धनी हो. (५५) ebook converter DEMO Watermarks*