भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1528, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1528

किया है. अधिक शब्द वाले यज्ञ में ऋत्विजों ने सोमरस निचोड़ा. (९) इन्द्राय सोम पातवे वृत्रघ्ने परि षिच्यसे. नरे च दक्षिणावते देवाय सदनासदे.. (१०) हे सोम! तुम वृत्रहंता इंद्र के पान हेतु पात्रों में निचोड़े जाते हो. तुम ऋत्विजों को दक्षिणा देने वाले एवं देवों को हव्य देने की इच्छा से यज्ञशाला में बैठे हुए यजमान को फल देने के लिए निचोड़े जाते हो. (१०) ते प्रत्नासो व्युष्टिषु सोमाः पवित्रे अक्षरन्. अपप्रोथन्तः सनुतर्हुरश्चितः प्रातस्ताँ अप्रचेतसः.. (११) प्रत्येक प्रातःकाल में प्राचीन सोम दशापवित्र के ऊपर निचोड़े जाते हैं. सोम छिपे हुए, ज्ञानरहित एवं चोरों को प्रातःकाल ही भगा देते हैं. (११) तं सखायः पुरोरुचं यूयं वयं च सूरयः. अश्याम वाजगन्ध्यं सनेम वाजपस्त्यम्.. (१२) हे मित्रो! हम और तुम दोनों ही विशेष ज्ञान वाले हैं. हम सामने सुशोभित एवं बलकारक उत्तम गंध वाले सोम को पिएं. हम बलकारक सोम की सेवा करें. (१२) सूक्त—९९ देवता—पवमान सोम आ हर्यताय धृष्णवे धनुस्तन्वन्ति पौंस्यम्. शुक्रं वयन्त्यसुराय निर्णिजं विपामग्रे महीयुवः.. (१) सबके द्वारा अभिलाषा योग्य एवं शत्रुओं को नष्ट करने वाले सोम के लिए पौरुष प्रकट करने वाले धनुष पर डोरी चढ़ाई जाती है. पूजा के अभिलाषी ऋत्विज् लोग बुद्धिमान् देवों के आगे शक्तिशाली सोम के लिए सफेद रंग का दशापवित्र फैलाते हैं. (१) अध क्षपा परिष्कृतो वाजाँ अभि प्र गाहते. यदि विवस्वतो धियो हरिं हिन्वन्ति यातवे.. (२) रात बीतने पर जलों से सुशोभित सोम अन्नों को लक्ष्य करके जाते हैं. सेवा करने वाले यजमान की कर्म करने वाली दस उंगलियां हरे रंग के सोम को पात्र में भेजती हैं. (२) तमस्य मर्जयामसि मदो य इन्द्रपातमः. यं गाव आसभिर्दधुः पुरा नूनं च सूरयः.. (३) हम सोम के उस रस को शुद्ध करते हैं, जो नशीला एवं इंद्र के द्वारा अत्यंत पेय है. गतिशील स्तोता उस रस को पहले भी मुखों द्वारा पीते थे और इस समय भी पीते हैं. (३) ebook converter DEMO Watermarks*