ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1529, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंतं गाथया पुराण्या पुनानमभ्यनूषत. उतो कृपन्त धीतयो देवानां नाम बिभ्रतीः.. (४) स्तोतागण प्राचीन गाथाओं द्वारा शुद्ध होते हुए सोम की स्तुति करते हैं. देवों के कार्य के लिए मुड़ने वाली उंगलियां देवों को सोम-रूप हवि देने के लिए समर्थ होती हैं. (४) तमुक्षमाणमव्यये वारे पुनन्ति धर्णसिम्. दूतं न पूर्वचित्तय आ शासते मनीषिणः.. (५) मेधावी यजमान पानी से भीगे हुए एवं सबको धारण करने वाले सोम को भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर शुद्ध करते हैं एवं देवों को अपनी बात बताने के लिए दूत के समान सोम की प्रार्थना करते हैं. (५) स पुनानो मदिन्तमः सोमश्चमूषु सीदति. पशौ न रेत आदधत्पतिर्वचस्यते धियः.. (६) अत्यंत नशीले सोम शुद्ध होकर चमू नामक पात्रों में स्थित होते हैं. गाय में वीर्य धारण करने वाले बैल के समान चमू पात्रों में रस डालने वाले एवं यज्ञकर्म के स्वामी सोम की स्तुति की जाती है. (६) स मृज्यते सुकर्मभिर्देवो देवेभ्यः सुतः. विदे यदासु संददिर्महीरपो वि गाहते.. (७) देवों के लिए निचोड़े गए एवं दीप्तिशाली सोम को ऋत्विज् शुद्ध करते हैं. प्रजाओं में भली प्रकार दान करने वाले माने गए सोम महान् जल में नहाते हैं. (७) सुत इन्दो पवित्र आ नृभिर्यतो वि नीयसे. इन्द्राय मत्सरिन्तमश्चमूष्वा नि षीदसि.. (८) हे निचुड़े हुए और विस्तृत सोम! तुम ऋत्विजों द्वारा दशापवित्र पर ले जाए जाते हो. हे अत्यंत नशीले सोम! तुम इंद्र के लिए चमू नामक पात्रों में बैठते हो. (८) सूक्त—१०० देवता—पवमान सोम अभी नवन्ते अद्रुहः प्रियमिन्द्रस्य काम्यम्. वत्सं न पूर्व आयुनि जातं रिहन्ति मातरः.. (१) गाएं जिस प्रकार प्रथम अवस्था में उत्पन्न बछड़े को चाटती हैं, उसी प्रकार द्रोहरहित जल इंद्र के प्रिय एवं सुंदर सोम के पास जाते हैं. (१) पुनान इन्दवा भर सोम द्विबर्हसं रयिम्. त्वं वसूनि पुष्यसि विश्वानि दाशुषो गृहे.. (२) हे दीप्तिशाली एवं शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमारे लिए दोनों लोकों में बढ़ने वाला धन ebook converter DEMO Watermarks*