भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1543, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1543

यस्य ते पीत्वा वृषभो वृषायतेऽस्य पीता स्वर्विदः. स सुप्रकेतो अभ्यक्रमीदिषोऽच्छा वाजं नैतशः.. (२) हे सोम! अभिलाषापूरक इंद्र तुम्हें पीकर बैल के समान आचरण करते हैं. तुझ सर्वद्रष्टा सोम को पीकर इंद्र शोभनज्ञान वाले बनते हैं तथा शत्रुओं के अन्न पर उसी प्रकार आक्रमण करते हैं, जिस प्रकार घोड़ा युद्धस्थल की ओर जाता है. (२) त्वं ह्य१ङ्ग दैव्या पवमान जनिमानि द्युमत्तमः. अमृतत्वाय घोषयः.. (३) हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम अत्यंत दीप्तिशाली बनकर देवों को मरणरहित बनाने के लिए उन्हें लक्ष्य करके शीघ्र शब्द करते हो. (३) येना नवग्वो दध्यङ्ङपोर्णुते येन विप्रास आपिरे. देवानां सुम्ने अमृतस्य चारुणो येन श्रवांस्यानशुः.. (४) नई शैली से यज्ञ करने वाले अंगिरा ऋषि ने जिस सोम को पीकर पणियों द्वारा चुराई हुई गायों का द्वार खोला था, जिसे पीकर ब्राह्मणों ने चोरी गई हुई गाएं पाई थीं एवं जिस सोम की सहायता से यजमान ने यज्ञ आरंभ होने पर कल्याणकारक अमृत जल से संबंधित अन्न पाए थे, वे सोम देवों को अमर बनाने के लिए शब्द करते हैं. (४) एष स्य धारया सुतोऽव्यो वारेभिः पवते मदिन्तमः. क्रीळन्नूर्मिरपामिव.. (५) अत्यंत मादक, जलसमूह के समान खेल खेलने वाले निचुड़े हुए सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र से अपनी धाराएं कलश में गिराते हैं. (५) य उस्रिया अप्या अन्तरश्मनो निर्गा अकृन्तदोजसा. अभि व्रजं तन्विषे गव्यमश्व्यं वर्मीव धृष्णवा रुज.. (६) जिन सोम ने गतिशील अंतरिक्ष में स्थित मेघ से अपनी शक्ति द्वारा वर्षा कराई थी, वे ही सोम गायों और घोड़ों के समूह को सब जगह फैलाते हैं. हे शत्रुपराभवकारी सोम! तुम कवचधारी योद्धा के समान असुरों को मारो. (६) आ सोता परि षिञ्चताश्वं न स्तोममप्तुरं रजस्तुरम्. वनक्रक्षममुदप्रतम्.. (७) हे ऋत्विजो! अश्व के समान वेगशाली, स्तुतियोग्य, जलों एवं तेज के प्रेरक, जल खींचने वाले एवं जल में डूबे हुए सोम को निचोड़ो एवं जल से सींचो. (७) सहस्रधारं वृषभं पयोवृधं प्रियं देवाय जन्मने. ऋतेन य ऋतजातो विवावृधे राजा देव ऋतं बृहत्.. (८) हे ऋत्विजो! हजार धाराओं वाले, अभिलाषापूरक, जल बढ़ाने वाले एवं प्रिय सोम को ebook converter DEMO Watermarks*