ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1542, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमृजानो वारे पवमानो अव्यये वृषाव चक्रदो वने. देवानां सोम पवमान निष्कृतं गोभिरञ्जानो अर्षसि.. (२२) हे वर्षकारक सोम, मसले जाते हुए एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर छनते हुए सोम! तुम द्रोणकलश में शब्द करते हो. हे पवमान सोम! तुम गाय के दूध, दही के साथ मिलकर देवों के स्वच्छ स्थान को जाते हो. (२२) पवस्व वाजसातयेऽभि विश्वानि काव्या. त्वं समुद्रं प्रथमो वि धारयो देवेभ्यः सोम मत्सरः.. (२३) हे सोम! सारी स्तुतियों को ध्यान में रखकर तुम अन्न लाभ के लिए टपको. हे देवों के मदकारक एवं सब देवों में प्रमुख सोम! तुम समुद्र को विशेषरूप से धारण करते हो. (२३) स तू पवस्व परि पार्थिवं रजो दिव्या च सोम धर्मभिः. त्वां विप्रासो मतिभिर्विचक्षण शुभ्रं हिन्वन्ति धीतिभिः.. (२४) हे सोम! तुम धारण करने वालों के साथ पार्थिव एवं दिव्य लोकों में रस टपकाओ. हे विशेष द्रष्टा एवं श्वेत वर्ण सोम! बुद्धिमान् लोग स्तुतियों और उंगलियों द्वारा तुम्हें रस बहाने के लिए प्रेरित करते हैं. (२४) पवमाना असृक्षत पवित्रमति धारया. मरुत्वन्तो मत्सरा इन्द्रिया इया मेधामभि प्रयांसि च.. (२५) शुद्ध होते हुए, मरुतों से युक्त, नशीले, इंद्र द्वारा सेवित व स्तोताओं की स्तुतियों एवं हव्यों को लक्ष्य करके चले जाने वाले सोम दशापवित्र को पार करके अपनी धारा के रूप में बनते हैं. (२५) अपो वसानः परि कोशमर्षतीन्दुहिर्यानः सोतृभिः. जनयञ्ज्योतिर्मन्दना अवीवशद्गाः कृण्वानो न निर्णिजम्.. (२६) जल में निवास करने वाले व निचोड़ने वालों द्वारा प्रेरित सोम द्रोणकलश में जाते हैं. सोम दीप्ति उत्पन्न करते हुए एवं गाय के दूध आदि को अपने रूप में मिलाते हुए इस समय स्तुतियों की अभिलाषा करते हैं. (२६) सूक्त—१०८ देवता—पवमान सोम पवस्व मधुमत्तम इन्द्राय सोम क्रतुवित्तमो मदः. महि द्युक्षतमो मदः.. (१) हे अतिशय मधुर, अतिशय बुद्धिदाता, महान्, अत्यंत दीप्त एवं मदकारक सोम! तुम इंद्र के हेतु नशीले बनकर टपको. (१) ebook converter DEMO Watermarks*