भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1584, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1584

अनश्रवोऽनमीवाः सुरत्ना आ रोहन्तु जनयो योनिमग्रे.. (७) ये सधवा एवं शोभन पत्नियां-नारियां घृत और अन्न के साथ अपने घर में प्रवेश करें. ये स्त्रियां आंसुओं के बिना रोगरहित और शोभनधन वाली बनकर अपने घर में सबसे पहले पहुंचें. (७) उदीर्ष्व नार्यभि जीवलोकं गतासुमेतमुप शेष एहि. हस्तग्राभस्य दिधिषोस्तवेदं पत्युर्जनित्वमभि सं बभूथ.. (८) हे मृतक की पत्नी! तुम अपने पुत्रों और घर का ध्यान करके यहां से उठो. तुम इस मरे हुए के पास क्यों सोई हो? आओ. तुम इस पुरुष से पाणिग्रहण और गर्भाधान के अनुरूप व्यवहार कर चुकी हो. तुम इसके साथ मरने का विचार छोड़ो. (८) धनुर्हस्तादाददानो मृतस्यास्मे क्षत्राय वर्चसे बलाय. अत्रैव त्वमिह वयं सुवीरा विश्वाः स्पृधो अभिमातीर्जयेम.. (९) मैं प्रजारक्षण, तेज और बलप्राप्ति के लिए मरे हुए क्षत्रिय के हाथ से धनुष लेकर कह रहा हूं. हे मृत व्यक्ति! तुम यहीं रहो. हम शोभन संतान वाले होकर इस लोक में सब शत्रुओं को जीतें. (९) उप सर्प मातरं भूमिमेतामुरुव्यचसं पृथिवीं सुशेवाम्. ऊर्णम्रदा युवतिर्दक्षिणावत एषा त्वा पातु निर्ऋतेरुपस्थात्.. (१०) हे मृत व्यक्ति! तुम इस विस्तृत, व्याप्त एवं सुख देने वाली धरती माता के पास जाओ. हे यज्ञ की दक्षिणा देने वाले मृतक! युवती स्त्री एवं भेड़ के बालों के समूह के समान कोमल तृणों वाली यह धरती तुम्हारी हड्डियों की रक्षा करे. (१०) उच्छ्वञ्चस्व पृथिवि मा नि बाधथाः सूपायनास्मै भव सूपवञ्चना. माता पुत्रं यथा सिचाभ्येनं भूम ऊर्णुहि.. (११) हे पृथिवी! तुम मरे हुए व्यक्ति को ऊंचा रखो. इसे बाधा मत दो. तुम इसके लिए शोभन उपचार एवं शोभन स्थिति वाली बनो. माता जिस प्रकार अपने वस्त्र से पुत्र को ढक लेती है, उसी प्रकार धरती उस मृतक की अस्थियों को ढक लें. (११) उच्छ्वञ्चमाना पृथिवी सु तिष्ठतु सहस्रं मित उप हि श्रयन्ताम्. ते गृहासो घृतश्रुतो भवन्तु विश्वाहास्मै शरणाः सन्त्वत्र.. (१२) धरती इस मृतक व्यक्ति की हड्डियों के ऊपर ऊंचे टीले के रूप में स्थित हो. हजारों धूलिकण इसके ऊपर जम जावें. वे धूलिकण इसके लिए घी टपकाने वाले घर बनें एवं इसको सभी दिनों में सहारा दें. (१२) ebook converter DEMO Watermarks*