ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1586, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंजो गोपाल खोई हुई गायों की सब ओर खोज करता है, जो गायों को घर वापस ले जाता है, जो गायों को घर से चराने ले जाता है और चराकर लौटता है, वह सकुशल लौट आवे. (५) आ निवर्त नि वर्तय पुनर्न इन्द्र गा देहि. जीवाभिर्भुनजामहै.. (६) हे इंद्र! तुम हमारी ओर आओ एवं गायों को हमारी ओर लाओ. तुम हमें गाएं दो. हम अधिक दिन जीने वाली गायों का दूध पिएं. (६) परि वो विश्वतो दध ऊर्जा घृतेन पयसा. ये देवाः के च यज्ञियास्ते रय्या सं सृजन्तु नः.. (७) हे सर्वत्र स्थित देवो! मैं गाय के दूध, दही व घृत से तुम्हारी सेवा करता हूं जो यज्ञ के योग्य देव हैं, वे हमें गायरूप धन से मिलावें. (७) आ निवर्तन वर्तय नि निवर्तन वर्तय. भूम्याश्चतस्रः प्रदिशस्ताभ्य एना नि वर्तय.. (८) हे मेरी आत्मा! गायों को मेरे पास लाओ. हे गायो! तुम मेरे पास आओ. भूमि और चारों दिशाओं से गायों को मेरे पास लाओ. गाएं भी उक्त स्थानों से मेरे पास लौट आवें. (८) सूक्त—२० देवता—अग्नि भद्रं नो अपि वातय मनः.. (१) हे अग्नि! तुम मेरे मन को कल्याण के योग्य बनाओ. (१) अग्निमीळे भुजां यविष्ठं शासा मित्रं दुर्धरीतुम्. यस्य धर्मन्त्स्व१ रेनीः सपर्यन्ति मातुरूधः.. (२) मैं हवि का भोग करने वाले देवों के मध्य सबसे छोटे, अनुशासन के द्वारा मित्र एवं अपराजेय अग्नि की स्तुति करता हूं. बछड़े जिस प्रकार गाय का थन पीकर जीते हैं, उसी प्रकार अग्नि के यज्ञकर्म में समस्त देव, आहुतियां और स्तुतियां सेवा करती हैं. (२) यमासा कृपनीळं भासाकेतुं वर्धयन्ति. भ्राजते श्रेणिदन्.. (३) स्तोता यज्ञकर्म के आधार पर ज्वाला से पहचाने जाने वाले अग्नि को बढ़ाते हैं. स्तोताओं को मनचाहा फल देने वाले अग्नि प्रकाशित होते हैं. (३) अर्यो विशां गातुरेति प्र यदानड् दिवो अन्तान्. कविरभ्रं दीद्यानः.. (४) यजमानों के आश्रययोग्य अग्नि दीप्त होकर जब ऊपर उठते हैं, उस समय मेधावी ebook converter DEMO Watermarks*