ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1587, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअग्नि द्युलोक के अंतिम भाग एवं मेघ को व्याप्त करते हैं. (४) जुषद्धव्या मानुषस्योधर्वस्तस्थावृभ्वा यज्ञे. मिन्वन्सङ्ग पुर एति.. (५) यजमान के यज्ञ में हवि का उपभोग करने वाले अग्नि अनेक ज्वालाओं वाले बनकर ऊपर उठते हैं एवं यज्ञ की उत्तर वेदी को नापते हुए सबके सामने आते हैं. (५) स हि क्षेमो हविर्यज्ञः सृष्टीदस्य गातुरेति. अग्निं देवा वाशीमन्तम्.. (६) वे ही अग्नि सबके पालन के कारण हैं, वे ही हव्य एवं यज्ञ हैं. अग्नि देवों को बुलाने के लिए शीघ्र जाते हैं. देवगण स्तुतिवचन से युक्त अग्नि के पास आते हैं. (६) यज्ञासाहं दुव इषेऽग्निं पूर्वस्य शेवस्य. अद्रेः सूनुमायुमाहुः.. (७) मैं उत्कृष्ट सुख की प्राप्ति के लिए अग्नि की सेवा करना चाहता हूं. अग्नि देवों को बुलाने हेतु जाने वाले, पत्थरों के पुत्र व यज्ञ वहन करने वाले हैं. (७) नरो ये के चास्मदा विश्वेत्ते वाम आ स्युः. अग्निं हविषा वर्धन्तः.. (८) हवि के द्वारा अग्नि को बढ़ाते हुए हमारे जो भी पुत्र-पौत्र हैं, वे सभी पशु आदि धन के पास बैठें. (८) कृष्णः श्वेतोऽरुषो यामो अस्य ब्रध्न ऋज्र उत शोणो यशस्वान्. हिरण्यरूपं जनिता जजान.. (९) अग्नि का रथ काले रंग वाला, श्वेत वर्णयुक्त, चमकीला, महान्, सीधा चलने वाला, लाल एवं यशस्वी है. विधाता ने उसे सुनहरे रंग का बनाया है. (९) एवा ते अग्ने विमदो मनीषामूर्जो नपादमृतेभिः सजोषाः. गिर आ वक्षत्सुमतीरियान इषमूर्जं सुक्षितिं विश्वमाभाः.. (१०) हे शक्ति के नाती अग्नि! हविरूप अमर धनों से युक्त विमद नामक ऋषि ने उत्तम बुद्धि की कामना करते हुए तुम्हारे लिए ये स्तुतिवचन कहे हैं. तुम इन्हें स्वीकार करके विमद को धन, बल, शोभनगृह एवं सभी प्रकार के धन दो. (१०) सूक्त—२१ देवता—अग्नि आग्निं न स्ववृक्तिभिर्होतारं त्वा वृणीमहे. यज्ञाय स्तीर्णबर्हिषे वि वो मदे शीरं पावकशोचिषं विवक्षसे.. (१) हे अग्नि! हम कुश बिछे हुए यज्ञ की पूर्णता के लिए अपनी बनाई हुई स्तुतियों द्वारा देवों ebook converter DEMO Watermarks*