भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 159, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 159

हे इंद्र! तुम हमारी भक्ति से आकर्षित होकर इस यज्ञ में आओ. ब्राह्मण तुम्हारा आह्वान कर रहे हैं. तुम सोमरस लिए हुए वाघत नामक पुरोहित की प्रार्थना सुनने के लिए आओ. (५) इन्द्रा याहि तूतुजान उप ब्रह्माणि हरिवः. सुते दधिष्व नश्चनः.. (६) हे अश्व के स्वामी इंद्र! तुम हमारी प्रार्थना सुनने के लिए शीघ्र आओ और सोमरस से युक्त इस यज्ञ में हमारा अन्न स्वीकार करो. (६) ओमासश्चर्षणीधृतो विश्वे देवास आ गत. दाश्वांसो दाशुषः सुतम्.. (७) हे विश्वेदेवगण! तुम मनुष्यों के रक्षक एवं पालन करने वाले हो. हव्यदाता यजमान ने सोमरस तैयार कर लिया है, तुम इसे ग्रहण करने के लिए आओ. तुम लोगों को यज्ञ का फल देने वाले हो. (७) विश्वे देवासो अप्तुरः सुतमा गन्त तूर्णयः. उस्रा इव स्वसराणि.. (८) हे वृष्टि करने वाले विश्वेदेवगण! जिस प्रकार सूर्य की किरणें बिना आलस्य के दिन में आती हैं, उसी प्रकार तुम तैयार सोमरस को पीने के लिए जल्दी आओ. (८) विश्वे देवासो अस्रिध एहिमायासो अद्रुहः. मेधं जुषन्त वह्नयः.. (९) विश्वेदेवगण नाशरहित, विस्तृत बुद्धि वाले तथा वैर से हीन हैं. वे इस यज्ञ में पधारें. (९) पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती. यज्ञं वष्टु धियावसुः.. (१०) देवी सरस्वती पवित्र करने वाली तथा अन्न एवं धन देने वाली हैं. वे धन साथ लेकर हमारे इस यज्ञ में आएं. (१०) चोदयित्री सूनृतानां चेतन्ती सुमतीनाम्. यज्ञं दधे सरस्वती.. (११) सरस्वती सत्य बोलने की प्रेरणा देने वाली हैं तथा उत्तम बुद्धि वाले लोगों को शिक्षा देती हैं. वे हमारा यह यज्ञ स्वीकार कर चुकी हैं. (११) महो अर्णः सरस्वती प्र चेतयति केतुना. धियो विश्वा वि राजति.. (१२) सरस्वती नदी ने प्रवाहित होकर विशाल जलराशि उत्पन्न की है. साथ ही यज्ञ करने वाले लोगों में उन्होंने ज्ञान भी जगाया है. (१२) सूक्त—४ देवता—इंद्र सुरूपकृत्नुमूतये सुदुघामिव गोदुहे. जुहूमसि द्यविद्यवि.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*